मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का फैसला किया है। सरकार ने इसके लिए नए भर्ती नियमों का एक ड्राफ्ट (प्रारूप) जारी किया है। नए नियमों के तहत अब मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को छोड़कर बाकी सभी सरकारी पदों पर सीधी भर्ती परीक्षाओं को बंद कर दिया जाएगा।
इस समाचार की मुख्य बातें और बड़े बदलाव नीचे विस्तार से दिए गए हैं:
1. अब सीधी परीक्षा नहीं, स्कोर कार्ड से मिलेगी नौकरी
नए नियमों के अनुसार, अब नौकरियों के लिए सीधे भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं होगी। उम्मीदवारों को पहले कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा आयोजित की जाने वाली पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को एक स्कोर कार्ड दिया जाएगा। भविष्य में जब भी सरकारी विभागों में नौकरियां निकलेंगी, उम्मीदवार इसी स्कोर कार्ड के आधार पर आवेदन कर सकेंगे। जिन उम्मीदवारों के नंबर न्यूनतम अंक से कम होंगे, उन्हें कोई स्कोर कार्ड नहीं मिलेगा।
2. हर साल होंगी 3 पात्रता परीक्षाएं
कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा हर साल तीन अलग-अलग श्रेणियों में पात्रता परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा:
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संयुक्त सामान्य पात्रता परीक्षा: यह ग्रेजुएट स्तर की सभी गैर-तकनीकी (Non-Technical) नौकरियों के लिए होगी।
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संयुक्त तकनीकी पात्रता परीक्षा: यह इंजीनियरिंग, कृषि, कानून और पैरामेडिकल जैसे तकनीकी पदों के लिए आयोजित की जाएगी।
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शिक्षक पात्रता परीक्षा: यह विशेष रूप से स्कूल शिक्षकों की भर्ती के लिए होगी।
नोट: सामान्य और तकनीकी दोनों परीक्षाओं में 100-100 प्रश्न पूछे जाएंगे। सामान्य परीक्षा का पेपर चार भागों में बंटा होगा, जिसमें सामान्य ज्ञान (GK), करंट अफेयर्स और गणित जैसे विषय शामिल रहेंगे।
3. स्कोर कार्ड की वैधता (Validity)
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सामान्य और तकनीकी परीक्षा: इन परीक्षाओं का रिजल्ट पर्सेंटाइल स्कोर के रूप में जारी होगा। यह स्कोर कार्ड लगभग ढाई साल तक मान्य रहेगा (यानी जिस वर्ष रिजल्ट आया है, उसके अगले दो वर्षों की 31 दिसंबर तक)।
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शिक्षक पात्रता परीक्षा: इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी जीवनभर के लिए पात्र (Eligible) माने जाएंगे, लेकिन किसी भी नौकरी में आवेदन करते समय उनके स्कोर कार्ड की वैधता भी केवल ढाई साल ही रहेगी।
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उम्मीदवार अपना स्कोर सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
4. MPPSC की परीक्षाओं में भी बदलाव
यह नया नियम एमपी-पीएससी पर भी प्रभाव डालेगा। अब MPPSC अलग-अलग पदों के लिए अलग परीक्षा कराने के बजाय पांच बड़े समूहों में संयुक्त परीक्षा (Combined Exam) आयोजित करेगा। इनमें राज्य सेवा, वन सेवा, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग समूह शामिल होंगे।
5. ग्रुप-सी और ग्रुप-डी की भर्तियां अब केंद्रीयकृत
अब कोई भी सरकारी विभाग अपने स्तर पर ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के पदों पर सीधे भर्ती नहीं कर सकेगा। सभी विभागों को ईएसबी (ESB) की संयुक्त अर्हता परीक्षा के माध्यम से ही नियुक्तियां करनी होंगी। इसके अलावा, सभी विभागों को हर साल 30 सितंबर तक अपने खाली पदों की जानकारी सरकार को सौंपनी होगी।
6. आयु सीमा और आरक्षण के नए नियम
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उम्र की गणना: उम्मीदवारों की आयु की गणना भर्ती वाले वर्ष के अगले साल की 1 जनवरी से की जाएगी। उम्र के प्रमाण के तौर पर केवल 10वीं की मार्कशीट को ही सही माना जाएगा।
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आरक्षण में बड़ा बदलाव: यदि कोई आरक्षित वर्ग (Reserved Category) का उम्मीदवार आयु सीमा या अंकों में किसी भी प्रकार की छूट (Relaxation) का लाभ लेता है, तो उसे केवल आरक्षित सूची में ही गिना जाएगा। ऐसे उम्मीदवारों को जनरल (Unreserved) मेरिट सूची में स्थान नहीं दिया जाएगा।
7. गड़बड़ी करने वालों पर कड़ा एक्शन
परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों को सख्त किया गया है। यदि कोई उम्मीदवार अपनी जगह किसी दूसरे को परीक्षा में बैठाता है (फर्जीवाड़ा करता है), या नकली दस्तावेज/मार्कशीट जमा करता है, तो उसकी उम्मीदवारी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा, परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी स्टाफ से बदसलूकी करने पर भी सीधी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, ईएसबी (ESB) को शासन की सलाह से परीक्षाओं का सिलेबस बदलने या अलग-अलग परीक्षाओं के लिए एक समान सिलेबस तय करने का पूरा अधिकार दिया गया है।




