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भोपाल की 900 से ज्यादा बड़ी सोसायटियों को खुद करना होगा कचरे का निपटारा, निगम लेगा भारी चार्ज

 

बल्क वेस्ट के नियम: इन 4 शर्तों से तय होंगे ‘बड़े कचरा उत्पादक’

यदि कोई भी परिसर नीचे दी गई चार शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ माना जाएगा और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा:

1. आवासीय परिसर: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसाइटी।

2. व्यावसायिक परिसर: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन या बाजार।

3. कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।

4. पानी की खपत : रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर (भोपाल में ऐसी 900 सोसायटियां हैं)।

सोसायटियों के पास कचरा निपटान के 3 विकल्प और ‘निगम का चार्ज’

नए कानून के तहत सोसायटियों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन रास्ते दिए गए हैं। यदि वे तीसरा विकल्प चुनकर कचरा नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन भेजती हैं, तो उन्हें प्रति टन के हिसाब से यह चार्ज देना होगा:

विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाकर खुद निपटारा करें।

विकल्प 2: वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।

विकल्प 3 (निगम को सौंपने पर प्रति टन दरें):

आवासीय सोसायटियां : 2,100 रुपये प्रति टन

सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: 2,400 रुपये प्रति टन

मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: 2,700 रुपये प्रति टन

जो सोसायटियां कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (सूखा, गीला, सैनिटरी, ई-वेस्ट) छांटकर देंगी, उन्हें सिर्फ 922 रुपये प्रति टन देना होगा। मिक्स कचरा देने पर इन दरों का 150% जुर्माना लगेगा।

अब रखने होंगे 4 अलग डस्टबिन

शहर की कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार श्रेणियों में कचरा छांटना होगा:

1. गीला कचरा: रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके।

2. सूखा कचरा: रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, कांच, कपड़े।

3. सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, घरेलू मेडिकल वेस्ट।

4. घरेलू ई-वेस्ट: पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।

शादी-पार्टी के लिए नया नियम: घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल होने पर आयोजन से 3 दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी।

104 करोड़ के लक्ष्य में से केवल 38 करोड़ वसूले

निगम कमिश्नर संस्कृति जैन और महापौर के दावों के विपरीत जमीन पर इस कानून को लागू करना अग्निपरीक्षा जैसा है। बीते साल कचरा कलेक्शन फीस के रूप में निगम का लक्ष्य 104 रुपये करोड़ वसूलने का था, लेकिन हकीकत में तंत्र इतना लचर रहा कि महज 36% यानी 38.43 रुपये करोड़ ही वसूले जा सके। जब सामान्य फीस की रिकवरी नहीं हो पा रही, तो 900 से ज्यादा बड़े संस्थानों पर कड़े नियम लादकर कमर्शियल चार्ज वसूलना बड़ी चुनौती होगी।

टैक्स में मिलेगी राहत और 100% ट्रैकिंग

निगम कमिश्नर संस्कृति जैन के अनुसार, जो बड़ी कॉलोनियां अपने कैंपस में ही कचरे का 100% निपटारा (निष्पादन) करेंगी, उनका सालाना कचरा कलेक्शन चार्ज कम किया जाएगा। कचरा फेंकने वाली गाड़ियों की डिजिटल ट्रैकिंग होगी और हर सोसाइटी को रजिस्टर्ड एजेंसी का पूरा हिसाब देना होगा कि उसने कचरे से कितनी खाद या बायोगैस बनाई।

18 महीने में बदलेगी सूरत: 1 अप्रैल 2026 से लागू केंद्र के ठोस अपशिष्ट नियमों को चरणबद्ध तरीके से डेढ़ साल में जमीन पर उतारेगा नगर निगम; ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ के कड़े नियम।

पानी की खपत से तय हुए ‘बड़ा कचरा उत्पादक’: जिस कॉलोनी या परिसर में रोज 40,000 लीटर पानी खर्च हुआ, वह सीधे नए कानून के शिकंजे में; खुद कचरा नष्ट करने पर टैक्स में मिलेगी राहत।

मिक्स कचरा दिया तो 150% जुर्माना: नगर निगम को बिना छंटनी (अथक पृथक) कचरा सौंपने पर लागू दरों का 150 प्रतिशत देना होगा दंड; सोसायटियों के पास होंगे 3 विकल्प।

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