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भोपाल का कुशाभाऊ ठाकरे आवासीय परिसर जर्जर, 3 हजार लोग खतरे में; दो बार गिर चुकी छत

 

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे आवासीय परिसर की जर्जर इमारतें हादसे का खतरा बनी हैं। हजारों रहवासी भय में जी रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद मरम्मत शुरू नहीं…और पढ़ें

भोपाल का कुशाभाऊ ठाकरे आवासीय परिसर जर्जर, 3 हजार लोग खतरे में; दो बार गिर चुकी छत

कुशाभाऊ ठाकरे आवासीय परिसर की हालत बदतर। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. 10 साल पुराना परिसर जर्जर हालत में।
  2. दो बार छत गिरने की घटना हो चुकी।
  3. 3 हजार से अधिक लोग खतरे के बीच रह रहे।

डिजिटल डेस्क। भोपाल के 12 नंबर स्टैंड स्थित कुशाभाऊ ठाकरे आवासीय परिसर की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। महज 10 साल पहले बने इस सरकारी आवासीय परिसर की इमारतें अब जर्जर हो चुकी हैं। दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है, सरियों तक खुलकर बाहर आ गई हैं और कई जगह छतों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।

रहवासियों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। हजारों लोग डर के साये में रहने को मजबूर हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अब तक ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

 

10 साल में ही जर्जर हो गया सरकारी आवासीय परिसर

साल 2015 में आवंटित इस परिसर में कुल 118 दुकानें और चार मंजिला इमारतों में 24-24 फ्लैट बने हैं। यहां तीन हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। वर्ष 2018 से ही भवनों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई थी। अब स्थिति यह है कि कई ब्लॉकों की दीवारों का प्लास्टर लगातार गिर रहा है। कंक्रीट के भीतर की सरियां साफ दिखाई देने लगी हैं।

दो बार गिर चुकी है छत

रहवासियों के अनुसार अब तक परिसर में दो बार छत का हिस्सा गिर चुका है। सौभाग्य से उस समय कोई व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था, इसलिए बड़ा हादसा टल गया। जनवरी 2022 से लेकर अब तक रहवासी कलेक्टर, मुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

सीवेज व्यवस्था भी पूरी तरह बदहाल

भवनों की जर्जर स्थिति के साथ-साथ परिसर की सीवेज व्यवस्था भी चरमरा गई है। कई स्थानों पर गंदा पानी सड़कों और गलियों में बह रहा है। इससे बदबू फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है।

रहवासियों ने नगर निगम, क्षेत्रीय विधायक और सीएम हेल्पलाइन तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं। हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

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