भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान निहसाद ने देश की पहली स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर एएसएफ वैक्सीन विकसित की है।

भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान।
HighLights
- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया
- यह वैक्सीन एमए-104 सेल लाइन से तैयार की गई है
- 8 हफ्ते से बड़े सुअर को 1 मिली का इंजेक्शन लगेगा, फिर बूस्टर डोज
भोपाल। भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान ने देश की पहली स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर एएसएफ वैक्सीन विकसित कर ली है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे नई दिल्ली में राष्ट्र को समर्पित किया। यह वैक्सीन एमए-104 सेल लाइन से बनी है।
आठ हफ्ते से बड़े सुअर को एक मिली का इंजेक्शन दिया जाएगा। 14 दिन बाद बूस्टर लगेगा। 2020 से एएसएफ से असम और मिजोरम में हजारों करोड़ का नुकसान हुआ। इस सस्ती वैक्सीन से किसानों को राहत मिलेगी और भारत निर्यात भी कर सकेगा।
मनुष्यों में फैलने का खतरा
पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के मामले देश के अलग-अलग प्रदेशों से सामने आए हैं। इसमें सुअर पालन करने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। झुंड में एक सुअर में भी इसके लक्षण मिल जाएं तो उसके साथ मौजूद सभी सुअरों को मार दिया जाता है। इस फीवर का सबसे बड़ा खतरा सुअरों से मनुष्यों में फैलने का होता है।
इस वायरस को लेकर कहा जाता है कि इसमें सबसे ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से यह किसी भी वस्तु की सतह पर आसानी से जीवित रहता है। ऐसे में सुअरों के मांस से बनने वाली चीजों के जरिए इसके फैलने का सबसे बड़ा खतरा रहता है। भोपाल में निहसाद में इसकी रोकथाम के लिए रिसर्च चल रहा था, कई परिक्षणों के बाद जो परिणाम सामने आए वो सकारात्म रहे।




