भोपाल। कलियासोत की पहाड़ी पर स्थित हकीम सैयद जियाउल हसन शासकीय स्वशासी यूनानी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में देश का पहला अत्याधुनिक सरकारी हम्माम सेंटर बनने जा रहा है। इसके लिए कॉलेज कैंपस में 3,000 वर्गफीट जमीन पहले ही आरक्षित कर दी गई है।
यूनानी पद्धति से मरीजों के इलाज और शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करने यानी बॉडी डिटाक्स के लिए यह सेंटर खास होगा, लेकिन चार साल पहले घोषित यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अभी लोक निर्माण विभाग की सुस्ती के कारण कागजों में ही अटका है।
बाधा बनी पीडब्ल्यूडी की डीपीआर
पीडब्ल्यूडी ने अब तक प्रोजेक्ट की डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके कॉलेज प्रबंधन को नहीं सौंपी है। डीपीआर के बिना टेंडर और निर्माण शुरू नहीं हो सकता। कॉलेज सूत्रों के अनुसार, हम्माम के निर्माण और उपकरणों के लिए शुरुआती बजट तीन करोड़ रुपये तय किया गया था।
समय पर डीपीआर न बनने और देरी के कारण अब लागत बढ़ने की पूरी संभावना है। यूनानी कॉलेज में बनने वाले इस हम्माम में गंभीर बीमारियों के मरीजों को वैज्ञानिक और यूनानी चिकित्सा के तहत इलाज मिलेगा।
तीन स्टेज में 90 मिनट की थेरेपी
प्रोजेक्ट की तकनीकी रूपरेखा तैयार करने वाले रीडर डॉ. महफूज उर रहमान ने बताया कि पूरी प्रक्रिया 90 मिनट में पूरी होगी। इसके लिए तीन अलग-अलग तापमान वाले कमरे बनाए जाएंगे।
पहला कमरा – कंफर्ट जोन: 14×14 स्क्वायर फीट, दीवारें नौ इंच मोटी। तापमान 22 से 24 डिग्री। मरीज को 10-15 मिनट बैठाया जाएगा ताकि शरीर का तापमान सामान्य हो।
दूसरा कमरा – गर्म जोन: 10×12 स्क्वायर फीट। तापमान 36.5 से 38 डिग्री। पसीना लाने के लिए 5-10 मिनट यहां रखा जाएगा।
तीसरा कमरा – मुख्य थेरेपी रूम: 450 से 600 स्क्वायर फीट। दीवारें 24 इंच मोटी। तापमान 42 से 47 डिग्री और गर्म पानी 40 से 45 डिग्री। इसमें तीन टेम्पररी चेंबर होंगे जहां तीन मरीजों का इलाज एक साथ तीन सहायकों की देखरेख में होगा।
गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा
डोम शेप, कापर पाइप और एलपीजी भट्टी अंतिम कमरा गुंबद आकार का होगा। इसमें छोटे-छोटे खुलने-बंद होने वाले कांच और विशेष चित्रकारी होगी, ताकि इलाज के दौरान मरीज मानसिक रूप से शांत रहे। पानी को गर्म करने के लिए एलपीजी गैस का इस्तेमाल किया जाएगा। ताकि करंट का खतरा न रहे। कमरों के नीचे तांबे की प्लेट लगेगी।
भाप के सही प्रवाह के लिए दीवारों में ऊपर से नीचे तक कापर पाइप बिछाए जाएंगे। फर्श पर थर्मारेजिस्ट्रेंट टाइल्स और दीवारों में थर्मारेजिस्ट्रेंट ब्रिक्स लगेंगी ताकि गर्मी और कंप्रेशन झेला जा सके।
हम्माम सेंटर बनने से मरीजों को प्राकृतिक तरीके से शरीर डिटाक्स और पुरानी बीमारियों से राहत का नया विकल्प मिलेगा। यह देश के किसी सरकारी यूनानी कॉलेज में पहली सुविधा होगी। पीडब्ल्यूडी को पत्र भेजा गया है। डीपीआर मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निर्माण कराया जाएगा।- डॉ. महबूबा बेगम, प्राचार्य, यूनानी कॉलेज




