मप्र में मंडियों की श्रेणी अब आय और आवक से तय होगी। संशोधित नियमों में वार्षिक आय के साथ कृषि उपज की मात्रा को आधार बनाया गया है।

फोटो, एआई से तैयार की गई है।
HighLights
- मंडियों की श्रेणी अब आय और आवक से तय होगी
- 6 करोड़ से अधिक आय पर ‘क’ श्रेणी
- तीन साल की औसत आवक बनेगी आधार
भोपाल । प्रदेश सरकार में कृषि मंडियों के वर्गीकरण के लिए नियम में संशोधन किया गया है। मंडियों में आने वाली उपज की मात्रा और वार्षिक आय के आधार पर मंडियों की श्रेणी निर्धारित होगी। वार्षिक आवक पहले के तीन वर्ष की औसत आवक के आधार पर तय की जाएगी।
इस तरह होगा श्रेणी का निर्धारण
कृषि विभाग द्वारा संशोधित नियम के अनुसार क श्रेणी में उस मंडी को शामिल किया जाएगा, जिसकी वार्षिक आय 6 करोड़ रुपये से अधिक हो। साथ ही सालभर में उपज ढाई लाख टन से अधिक आई हो।
इसी तरह ‘ख’ श्रेणी के लिए वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 6 करोड़ से कम और वार्षिक उपज की आवक 1.25 लाख टन से ज्यादा लेकिन ढाई लाख टन से कम होनी चाहिए।
‘ग’ श्रेणी में उन मंडियों को रखा गया है, जिनकी वार्षिक आय डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 3 करोड़ रुपये से कम और वार्षिक उपज की आवक 50 हजार टन से अधिक किंतु 1.25 लाख टन से कम हो।
‘घ’ श्रेणी की मंडियां वे होंगी, जिनकी वार्षिक डेढ़ करोड़ रुपये से कम और उपज की वार्षिक आवक 50 हजार टन से कम हो।




