Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

Bhopal Master Plan:3 बार बने ड्राफ्ट, पर मास्टर प्लान पर नहीं लग सकी अंतिम मुहर, राजनीतिक खींचतान में उलझा भोपाल का भविष्य

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

बिना मास्टर प्लान के बढ़ रही भोपाल की रफ्तार: 21 साल से कागजों में उलझा प्लान, ट्रैफिक और अवैध कॉलोनियों से जूझ रही राजधानी

भोपाल: देश के अन्य बड़े शहर जहां समय के साथ आधुनिक विकास और बेहतर प्लानिंग की मिसाल बन रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पिछले 21 सालों से बिना किसी मास्टर प्लान के बेतरतीब तरीके से फैल रहा है। राजनीतिक खींचतान, बिल्डर सिंडिकेट और रसूखदारों की मिलीभगत के चलते शहर का नया मास्टर प्लान आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। नतीजा यह है कि आज भोपाल का हर नागरिक जाम, संकरी सड़कों और अव्यवस्थित कॉलोनियों की मार झेलने को मजबूर है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 21 साल से मास्टर प्लान गायब: वर्ष 2005 के बाद से भोपाल का कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है। 2009, 2021 और 2031 के लिए ड्राफ्ट बने, लेकिन फाइलें दफ्तरों में ही धूल फांकती रहीं। अब 2047 के लिए सर्वे चल रहा है।

  • 22 महत्वपूर्ण सड़कें नहीं बनीं: पुराने मास्टर प्लान में प्रस्तावित 34 में से 22 सड़कों का निर्माण आज तक नहीं हो पाया, जिससे शहर का ट्रैफिक नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है।

  • भू-माफियाओं को फायदा: मास्टर प्लान लागू न होने से कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काटने का खेल बेरोक-टोक जारी है, जिससे आम जनता अपनी जिंदगीभर की कमाई गंवा रही है।

  • खेल नगर और बाजारों का सपना अधूरा: लंबाखेड़ा में प्रस्तावित खेल नगर और भानपुर के पास बनने वाला व्यवस्थित बाजार व गार्डन का प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमट कर रह गया।

शहर की बदहाली की मुख्य वजहें और अटके प्रोजेक्ट्स

  1. मिसरोद-बर्रई मास्टर प्लान रोड का बदला डिजाइन: रसूखदारों और बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए सीधी बनने वाली सड़क का डिजाइन बदलकर उसे खतरनाक घुमावदार बना दिया गया है, जबकि उस रूट पर कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े हो गए हैं।

  2. अयोध्या नगर से बायपास की कनेक्टिविटी गायब: 2005 के प्लान में अयोध्या नगर से भोपाल बायपास के लिए 4 कनेक्टिंग सड़कें बननी थीं, जो आज तक नहीं बनीं। इसके चलते नागरिकों को आनंद नगर और भानपुर से लंबा चक्कर काटना पड़ता है।

  3. अधूरे पड़े मार्ग: भोपाल रेलवे स्टेशन से पिपलानी पेट्रोल पंप तक 80 फीट चौड़ी सीधी सड़क बननी थी, जो सिर्फ अशोका गार्डन टंकी तक सिमट कर रह गई। यदि यह बनती, तो रायसेन रोड पर ट्रैफिक का भारी दबाव नहीं होता। इसी तरह कोलार-नीलबड़ बाईपास का बीच का हिस्सा अधूरा होने से नर्मदापुरम रोड पर दबाव बढ़ गया है।

  4. खेल नगर का प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में: लंबाखेड़ा और मालीखेड़ी के बीच प्रस्तावित राज्य स्तरीय खेल नगर विकसित न होने से भोपाल के खिलाड़ी आज भी केवल टीटी नगर स्टेडियम पर निर्भर हैं।

मास्टर प्लान लागू होने से क्या बदल सकता है?

  • ट्रैफिक से राहत: प्रस्तावित और नई सड़कों के जुड़ने से शहर के मुख्य रास्तों का लगभग 40 प्रतिशत ट्रैफिक दबाव कम हो जाएगा।

  • सुव्यवस्थित विकास: कौन सा क्षेत्र रिहायशी (Residential) होगा, कहां इंडस्ट्री लगेगी और कहां पार्क होंगे, यह तय होने से बेतरतीब निर्माण रुकेंगे।

  • अवैध कॉलोनियों पर लगाम: आम नागरिकों को सस्ती दरों पर बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं वाले वैध प्लॉट मिल सकेंगे।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए अब राजनीति से ऊपर उठकर जल्द से जल्द नया मास्टर प्लान धरातल पर उतारना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि राजधानी को भविष्य के संकटों से बचाया जा सके।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply