एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में मेट्रोपालिटन सिटी की तैयारी: भोपाल-इंदौर का उपनगरों तक होगा मेट्रो का विस्तार, जबलपुर और ग्वालियर के लिए भी बनेगी मेट्रो परियोजना
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देते हुए ‘विकसित मध्य प्रदेश-2047’ की कार्ययोजना के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। इंदौर और भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान के साथ-साथ अब सरकार इन महानगरों को ‘मेट्रोपालिटन सिटी’ के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत मेट्रो रेल का विस्तार केवल शहरों तक सीमित न रहकर आसपास के उपनगरों और छोटे शहरों तक किया जाएगा, ताकि नागरिकों को बेहतरीन सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) की सुविधा मिल सके।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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मेट्रोपालिटन रीजन का दायरा: भोपाल और इंदौर के आसपास के जिलों को मिलाकर मेट्रोपालिटन क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जहां की लाखों की आबादी को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।
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इन शहरों को जोड़ने की योजना: भोपाल से विदिशा, नर्मदापुरम और रायसेन, तथा इंदौर से देवास, महू, उज्जैन और पीथमपुर तक मेट्रो लाइन बिछाने पर विचार चल रहा है।
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जबलपुर और ग्वालियर में भी मेट्रो: भोपाल और इंदौर के बाद अब जबलपुर और ग्वालियर के लिए भी मेट्रो परियोजना तैयार की जाएगी।
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मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी: मेट्रो स्टेशनों को स्थानीय बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ा जाएगा, ताकि यात्री आसानी से गांवों और शहर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकें।
मेट्रोपालिटन रीजन और कार्ययोजना
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इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन: इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम—कुल 6 जिलों के हिस्से (38 तहसीलें और 2781 गांव) शामिल हैं। यहाँ की 80-90 लाख आबादी को ध्यान में रखकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की योजना बनाई जा रही है।
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भोपाल मेट्रोपालिटन रीजन: इसमें भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों के हिस्से (30 तहसीलें और 2510 गांव) जोड़े जाएंगे।
मुख्यमंत्री के समक्ष होगा प्रस्तुतीकरण
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) द्वारा इस पूरी कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष दिया जाएगा। इससे पहले इन प्रस्तावित शहरों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। एमडी एस. कृष्णा चैतन्य के अनुसार, कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (CMP) की स्वीकृति मिलने के बाद फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी और डीपीआर तैयार कर शासन व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना से न सिर्फ शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले हजारों अपडाउनर्स का समय बचेगा, बल्कि प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी पंख लगेंगे।




