एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
टाइपिंग-स्टेनोग्राफी परीक्षा घोटाला: 13 साल बाद भी जांच अधूरी, विशेष न्यायालय ने एसटीएफ को लगाई फटकार; कहा- “ऐसे तो 100 साल में भी खत्म नहीं होगा ट्रायल”
भोपाल: वर्ष 2013 में सामने आए बहुचर्चित टाइपिंग एवं स्टेनोग्राफी परीक्षा घोटाले की जांच और सुस्त रफ्तार पर अदालत ने बेहद कड़ी नाराजगी जताई है। करीब 2,947 संदेहियों के इस मामले में एसटीएफ (Special Task Force) 13 साल बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 252 लोगों की ही जांच कर चालान पेश कर सकी है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने मामले की धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि जांच इसी रफ्तार से चलती रही, तो इसे खत्म होने में 100 साल लग जाएंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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परीक्षा का बैकग्राउंड: लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 14 और 21 अप्रैल 2013 को हिंदी-अंग्रेजी शॉर्टहैंड और टाइपिंग परीक्षा आयोजित की थी। यह परीक्षा 128 केंद्रों पर हुई थी, जिसमें 11,968 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। बाद में इसमें बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं।
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संदेहियों और चार्जशीट की स्थिति: एसटीएफ ने जांच के दौरान 2,947 अभ्यर्थियों की कॉपियों को संदिग्ध पाया था। शुरुआती जांच में डीपीआई के 19 अधिकारियों-कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका मिलने पर पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालांकि, तब से लेकर अब तक 10 पूरक आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं, लेकिन संपूर्ण जांच अभी भी अधूरी है।
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अचानक रद्दीकरण और कानूनी पेच: शुरुआत में डीपीआई ने संदिग्धों के प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिए थे, जिसे बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर रद्द कर दिया गया। इसके बाद एसटीएफ ने संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई, जो आज तक खिंचती चली आ रही है।
अदालत की सख्त टिप्पणी और एसटीएफ को जवाबदेह बनाना
पिछली सुनवाई के दौरान जब एसटीएफ की तरफ से बेहद सीमित संख्या में नए चालान पेश किए जाने की बात सामने आई, तो अदालत ने तीखे सवाल किए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि जांच में अत्यधिक देरी का सीधा और नकारात्मक प्रभाव न्यायिक ट्रायल पर पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपेश शिक्केवाल के अनुसार, अदालत ने एसटीएफ को निर्देश दिए हैं कि वे इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करें:
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पिछले 13 वर्षों में भी जांच पूरी क्यों नहीं हो पाई?
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अभी कितनी विवेचना (Investigation) बाकी है?
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मुख्य ट्रायल को शीघ्र शुरू कराने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
अदालत की इस सख्ती के बाद अब एसटीएफ को इस लंबी देरी का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष पेश करना होगा।




