एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन की बड़ी पहल: गंभीर व जीवन-सीमित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अब घर पर मिलेगी ‘पेलिएटिव केयर’ (उपशामक देखभाल)
भोपाल: गंभीर और जीवन के अंतिम चरण की असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर, सुगम और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एम्स भोपाल ने एक सराहनीय कदम उठाया है। एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत अब भोपाल सहित पूरे मध्य भारत में ‘पेलिएटिव केयर’ (उपशामक देखभाल) सेवाओं को बड़े पैमाने पर मजबूत किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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घर पर मिलेगी उपशामक देखभाल: इस नई पहल के तहत मरीजों को उनके घर पर ही पेलिएटिव केयर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे अपने परिवार के बीच रहकर गरिमापूर्ण जीवन बिता सकेंगे।
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दर्द निवारण और मानसिक सहयोग: उपशामक देखभाल (Palliative Care) का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के शारीरिक दर्द और अन्य तकलीफों को कम करना तथा उन्हें व उनके परिजनों को जरूरी मानसिक एवं भावनात्मक संबल प्रदान करना है।
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विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता: एम्स भोपाल की पेलिएटिव केयर इकाई के प्रभारी डॉ. अनुज जैन के अनुसार, इस समझौते के जरिए समाज में इस देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। साथ ही, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीजों के लक्षणों और दर्द के सटीक प्रबंधन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।
मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
कैंसर जैसी गंभीर और उन्नत अवस्था की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अक्सर इलाज के दौरान तेज दर्द और भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन की यह संयुक्त पहल ऐसे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी, जिससे वे घर पर रहकर ही विशेषज्ञ चिकित्सीय निगरानी और भावनात्मक सहयोग प्राप्त कर सकेंगे।




