एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
शिक्षा व्यवस्था पर सियासत गरड़ाई: कांग्रेस का दावा- एमपी के 7,217 स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक, विश्वविद्यालयों में 65% पद रिक्त और डिग्रियों में देरी से भविष्य दांव पर
भोपाल: मध्य प्रदेश की स्कूली और उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने सोमवार को आयोजित एक पत्रकारवार्ता में राज्य के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, परीक्षा परिणामों में देरी और डिग्रियां मिलने में हो रहे विलंब को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन व्यवस्थागत कमियों के कारण लाखों विद्यार्थियों का भविष्य और रोजगार के अवसर अंधकार में जा रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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7,217 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक: कांग्रेस ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के 7,217 ऐसे स्कूल हैं, जो मात्र एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इसके अलावा, प्रदेश के कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों में लगभग 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं।
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प्रमुख विषयों के विशेषज्ञों का अभाव: सरकारी शिक्षण संस्थानों में गणित, भौतिकी (फिजिक्स), रसायन (केमिस्ट्री) और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेष शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इसके साथ ही, लगभग 463 स्कूल ऐसे भी सामने आए हैं जहां एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है।
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निजी विश्वविद्यालयों और परीक्षाओं पर सवाल: प्रदेश में संचालित 54 निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि कई संस्थानों में नियमित कक्षाएं नहीं लगतीं। परीक्षा परिणाम आने में 6 महीने से लेकर एक साल तक की देरी हो रही है और विद्यार्थियों को समय पर डिग्रियां न मिलने से उनके रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र में आ रही इन गंभीर बाधाओं और मिड-डे मील जैसी योजनाओं में अनियमितता के आरोपों को लेकर विपक्षी दल ने सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।




