एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश सरकार पर बढ़ता वित्तीय बोझ: बाजार से फिर लिया 1,500 करोड़ रुपये का कर्ज, चालू वित्त वर्ष में कुल कर्ज 54 हजार करोड़ के पार
भोपाल: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने विकास कार्यों और परियोजनाओं के संचालन के लिए एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लिया है। मंगलवार को सरकार ने दो अलग-अलग किस्तों में कुल 1,500 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2026 से अब तक) में लिया गया कुल बाजार कर्ज बढ़कर 54 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जिससे राज्य पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इस बढ़ते वित्तीय भार को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से आर्थिक स्थिति पर श्वेतपत्र (White Paper) जारी करने की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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बाजार से लिया गया नया कर्ज: राज्य सरकार ने मंगलवार को दो किस्तों में 1,500 करोड़ रुपये जुटाए:
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पहला कर्ज: 800 करोड़ रुपये (18 वर्ष की अवधि, भुगतान जुलाई 2044 में)।
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दूसरा कर्ज: 700 करोड़ रुपये (30 वर्ष की अवधि, भुगतान सितंबर 2056 में)।
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बढ़ता कुल कर्ज का आंकड़ा: पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक (31 मार्च 2026) मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 4,88,714 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष में सितंबर तक 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के बाद, अब राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर 5,42,614 करोड़ रुपये हो गया है।
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कांग्रेस की श्वेतपत्र जारी करने की मांग: प्रदेश पर लगातार बढ़ रहे वित्तीय बोझ को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मांग की गई है कि सरकार श्वेतपत्र जारी कर यह स्पष्ट करे कि 2026-27 में अब तक कितना नया कर्ज लिया गया है, तथा इस राशि का कितना हिस्सा पूंजीगत विकास कार्यों और कितना हिस्सा पुराने कर्जों व ब्याज के भुगतान में खर्च हुआ है।




