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भोपाल / अपराध एवं न्याय डेस्क
त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामला: CBI का सुप्रीम कोर्ट में सनसनीखेज खुलासा; मुख्य आरोपी सास गिरिबाला सिंह पर साक्ष्य मिटाने और CCTV फुटेज जुटाने का आरोप
भोपाल: चर्चित मॉडल-एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना काउंटर हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के ठीक अगले दिन मुख्य आरोपी सास और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने मामले के साक्ष्यों को प्रभावित करने और क्राइम सीन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज हासिल करने की कोशिश की थी। जांच एजेंसी ने आरोपियों के रसूख को देखते हुए भोपाल में चल रहे ट्रायल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की याचिका का समर्थन किया है और गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका जताई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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घटना के अगले दिन जुटाए गए थे CCTV फुटेज: सीबीआई के अनुसार, 13 मई 2026 को आरोपी गिरिबाला सिंह ने एक सीसीटीवी तकनीशियन से संपर्क कर घटना के समय के फुटेज की कॉपी निकलवाई थी। इसके साथ ही उन्होंने एक ब्यूटी पार्लर संचालिका से मृतका त्विषा के 12 मई के आवागमन की जानकारी मांगी और अपने आदमियों को भेजकर वहां के भी फुटेज हासिल कर लिए। एजेंसी ने इसे सीधे तौर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और सबूत मिटाने की कोशिश से जोड़ा है।
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ट्रायल दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग: मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने भोपाल की अदालत में चल रहे सेशन ट्रायल को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसी पर जवाब देते हुए सीबीआई ने माना है कि आरोपियों का प्रभावशाली बैकग्राउंड होने के चलते वे भोपाल में ट्रायल को प्रभावित कर सकते हैं और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं।
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सीबीआई द्वारा चार्जशीट पेश: इस बहुचर्चित मामले में सीबीआई ने गत 17 अगस्त 2026 को मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है, और वर्तमान में भोपाल की स्थानीय अदालत में आरोप तय (Framing of charges) करने की प्रक्रिया जारी है।
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क्या था पूरा मामला: गत 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में त्विषा शर्मा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया था। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठने के बाद, उच्च न्यायालय के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली एम्स के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से मृतका का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया था, जिसमें दहेज हत्या और अन्य पहलुओं की जांच अभी भी गहराई से की जा रही है।




