एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / ऊर्जा एवं कर्मचारी डेस्क
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में अभियंताओं का असंतोष गहराया: 36-38 साल की सेवा के बाद भी सिर्फ एक पदोन्नति मिलने पर सामूहिक वीआरएस और आंदोलन की चेतावनी
भोपाल: मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ अभियंताओं में पदोन्नति और उच्च पदों का चालू प्रभार दिए जाने में कथित भेदभाव को लेकर नाराजगी चरम पर पहुंच गई है। वर्ष 1989 और 1991 बैच में कनिष्ठ यंत्री (Junior Engineer) के रूप में सेवा की शुरुआत करने वाले इन अभियंताओं का कहना है कि उन्होंने अपने सेवाकाल के 36 से 38 वर्ष पूरे कर लिए हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल एक ही पदोन्नति मिल पाई है, जबकि अन्य संवर्गों के अधिकारी तीन-तीन पदोन्नतियां प्राप्त कर चुके हैं। अभियंताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने और बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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36 से 38 साल की लंबी सेवा के बाद भी एक ही पदोन्नति: अभियंताओं का आरोप है कि दशकों तक ईमानदारी से अपनी सेवाएं देने के बाद भी उनकी उपेक्षा की जा रही है। स्थिति यह है कि उनसे लगभग 20 साल बाद सेवा में आए अन्य कर्मचारी भी पदोन्नत होकर उच्च पदों पर पहुंच चुके हैं, जबकि वरिष्ठ अभियंता आज भी अपने मूल या शुरुआती पदों पर कार्य करने को विवश हैं।
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80 प्रतिशत को लाभ, 20 प्रतिशत वंचित: अभियंताओं ने ऊर्जा विभाग के 9 जून 2011 के परिपत्र को यथावत लागू रखने की मांग की है। उनके अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद 13 सितंबर 2021 को भी विभाग ने इस परिपत्र को कायम रखने की पुष्टि की थी। कंपनी के लगभग 80 प्रतिशत अभियंताओं को इसका लाभ मिल चुका है, लेकिन बचे हुए शेष 20 प्रतिशत पात्र अभियंता आज भी इसके लाभ से वंचित हैं।
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मानसिक दबाव और भेदभाव का आरोप: अभियंताओं ने प्रबंधेण पर आरोप लगाया है कि पदोन्नति और उच्च पदों का चालू प्रभार (Current Charge) सौंपने में स्पष्ट रूप से भेदभाव किया जा रहा है। इस निरंतर उपेक्षा के कारण अधिकारियों और अभियंताओं में गहरा मानसिक तनाव और असंतोष व्याप्त है।
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सामूहिक वीआरएस और आंदोलन का अल्टीमेटम: अपनी मांगों को लेकर मुखर हुए अभियंताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में शीघ्र उचित निर्णय नहीं लिया, तो वे सामूहिक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के रास्ते पर चलेंगे और सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेंगे।




