एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / प्रशासन एवं विकास डेस्क
भोपाल मास्टर प्लान-2047: 13 हजार आपत्तियों पर 16 नवंबर से लालघाटी तहसील भवन में होगी सुनवाई; वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की भी मिलेगी सुविधा
भोपाल: राजधानी के बहुप्रतीक्षित ‘मास्टर प्लान-2047’ के ड्राफ्ट पर जनता और जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों व आपत्तियों के निराकरण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। प्रशासन ने आपत्तियों की सुनवाई का पूरा शेड्यूल और रूपरेखा तय कर दी है। आगामी 16 नवंबर से लालघाटी स्थित हुजूर तहसील के नए भवन में आपत्तियों पर सुनवाई शुरू होगी। अगले 90 दिनों तक एडीएम प्रकाश नायक और नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) के अधिकारी आपत्तिकर्ताओं का पक्ष सुनकर शिकायतों का निपटारा करेंगे। जो लोग व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने की विशेष सुविधा भी दी जाएगी।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
-
16 नवंबर से शुरू होगी सुनवाई: मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को लेकर मिली लगभग 13 हजार वास्तविक आपत्तियों पर सुनवाई अगले 90 दिनों तक लगातार चलेगी। इसके लिए लालघाटी स्थित हुजूर तहसील के नए भवन को केंद्र बनाया गया है।
-
3 हजार डुप्लीकेट आपत्तियां हटाई गईं: प्रशासन को निर्धारित अंतिम तिथि (25 अक्टूबर) तक कुल 16 हजार से अधिक आपत्तियां प्राप्त हुई थीं। दस्तावेजों की छंटनी के दौरान यह पाया गया कि करीब 3 हजार आवेदन डुप्लीकेट थे (यानी लोगों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से एक ही आपत्ति दर्ज कराई थी)। इन्हें हटाने के बाद अब कुल वास्तविक आपत्तियों की संख्या 13 हजार रह गई है।
-
जनप्रतिनिधियों की बैठक में बनी रणनीति: गुरुवार को कलेक्टोरेट में सांसद आलोक शर्मा, स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सुनवाई की व्यवस्था को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक जैसी प्रकृति की आपत्तियों को आपस में मर्ज किया जाए, जिससे समूह में सुनवाई करके समय की बचत की जा सके और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।
तालाब संरक्षण जोन हटाने पर अड़े फंदा ब्लॉक के 66 गांव
मास्टर प्लान के मसौदे में सबसे बड़ा विरोध फंदा ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों से देखने को मिल रहा है। फंदा ब्लॉक के 66 गांवों के किसान बड़े तालाब के किनारे निर्माण प्रतिबंधों को लेकर पूरी तरह लामबंद हैं।
किसान नेता अनोखीमान सिंह पटेल का कहना है कि इन ग्रामीण इलाकों के किसानों की आजीविका पूरी तरह से कृषि (खेती-किसानी) पर निर्भर है। किसानों की मांग है कि मास्टर प्लान में शामिल ‘भोजताल संरक्षण जोन-1’ और ‘जोन-2’ के कड़े प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए और इन जमीनों का लैंडयूज (भूमि उपयोग) पूरी तरह कृषि ही रखा जाए। अब देखना यह होगा कि 16 नवंबर से शुरू होने वाली इस मैराथन सुनवाई में प्रशासन किसानों और अन्य आपत्तिकर्ताओं की इन चिंताओं का क्या समाधान निकालता है।




