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अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो’ नीति को जवाब देने वाला झांसी की रानी का 1857 का पत्र आया सामने

 

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता तो इतिहास के पन्नों में अमिट है ही, सबको साथ लेकर चलने की उनकी नीति भी अनुकरणीय है। पुरातत्व विभाग के अभिलेखागार में …और पढ़ें

 

अंग्रेजों की 'फूट डालो, राज करो' नीति को जवाब देने वाला झांसी की रानी का 1857 का पत्र आया सामने

झांसी की रानी का 1857 का पत्र आया सामने (एआई फोटो)

HighLights

  1. रानी ने पत्र लिख अंग्रेजों की चाल से किया सचेत
  2. पत्र पर मिली मराठा शैली की अष्टकोणीय मुहर
  3. आजादी के 250 अनसुने दस्तावेज होंगे डिजिटल

भोपाल। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता तो इतिहास के पन्नों में अमिट है ही, सबको साथ लेकर चलने की उनकी नीति भी अनुकरणीय है। पुरातत्व विभाग के अभिलेखागार में मिला एक पत्र उनकी इस नीति का प्रमाण है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति को भांपते हुए टीकमगढ़ की रानी लड़ाई दुलैया जू देव को भेजे पत्र में वह लिखती हैं, ‘आप मेरी बड़ी बहन जैसी हैं। आपसे एकता बनाए रखने का आग्रह करती हूं। आपसी फूट के प्रति सचेत करती हूं।’

‘ज्ञान भारत मिशन’ के तहत हो रहा ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन

बता दें, ‘ज्ञान भारत मिशन’ के अंतर्गत ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। इसी में तात्या टोपे का भी एक पत्र और हुक्मनामा भी सामने आ चुका है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रियासतों के विलय के बाद ये दस्तावेज पुरातत्व अभिलेखागार में लाए गए थे। अब डिजिटाइजेशन के लिए पन्ने खुलने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी गाथाएं सामने आ रही हैं। ऐसे लगभग 250 दस्तावेज हैं, जिन्हें स्कैन कर डिजिटाइज किया जा रहा है। अधिकतर बुंदेलखंड, मालवा और मध्य भारत में क्रांति की रणनीति को बताते हैं।

 

बुंदेली बोली में लिखा पत्र: अंग्रेजों की चालों के प्रति किया था आगाह

झांसी की रानी के बुंदेली बोली में लिखे पत्र का हिंदी में अनुवाद सैयद नईमुद्दीन ने किया है। पत्र पुराना होने के कारण इसके कई शब्द मिट गए हैं। पत्र में रानी लड़ाई दुलैया को झांसी की रानी ने लिखा था, ‘फौज की टुकड़ी तोप लेकर लड़ाई कर रही है। वहां की जिम्मेदारी रखो। इस ओर न नहीं करें। पुरानी रसम आज भी बांटने की (अंग्रेजों की बांटने की नीति के संबंध में) चली आती है। आप हमारी जेठी (बड़ी बहन) हैं। यह विनती है कि समझदारी से काम करो। कोई वारदात या बखेड़ा न करें।’

पहली बार सामने आई दुर्लभ अष्टकोणीय मुहर

रानी लक्ष्मीबाई के पत्र में सबसे ऊपर अष्टकोणीय मुहर लगी है। जिसमें दो बार ‘श्रीश्री’ लिखा है। बाकी हिस्सा पठनीय नहीं है। संचालनालय, पुरातत्व एवं अभिलेखागार की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा ने बताया कि यह मुहर इस मायने में महत्वपूर्ण है कि अष्टकोणीय मुहर मध्य प्रदेश की किसी रियासत में नहीं मिली है। मराठा साम्राज्य में जरूर देखने को मिली है। यह साम्राज्य के विस्तार के लक्ष्य को बताती है।

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