उज्जैन के सप्त सागर में से एक गोवर्धन सागर तालाब में विक्रमादित्य कपड़ा मार्केट और आसपास की बस्तियों से निकलने वाला सीवेज छोड़ा जा रहा है। …और पढ़ें

गोवर्धन सागर की दुर्दशा पर NGT सख्त
भोपाल। उज्जैन के सप्त सागर में से एक गोवर्धन सागर तालाब में विक्रमादित्य कपड़ा मार्केट और आसपास की बस्तियों से निकलने वाला सीवेज छोड़ा जा रहा है। तालाब पर बड़े स्तर पर अतिक्रमण कर मकान, दुकान और झुग्गियां तान लीं हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इसे गंभीर पर्यावरणीय संकट मानते हुए उज्जैन कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए अतिक्रमण हटाने और तालाब में सीवेज का प्रवाह पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए हैं।
सर्वे रिपोर्ट में खुलासा: 1.15 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर अवैध कब्जा
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने गोवर्धन सागर तालाब पर हो रहे अतिक्रमण और सीवेज छोड़कर तालाब के पानी को दूषित करने की याचिका को लेकर सुनवाई की। मामले में बेंच के सामने एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया है कि करीब 7.716 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले गोवर्धन सागर तालाब में करीब 1.15 हेक्टेयर में अतिक्रमण कर लिया गया है। इनमें मकान, दुकान और झुग्गियां तान दी गईं हैं। इसके अलावा विक्रमादित्य कपड़ा मार्केट और आसपास की बस्तियों से निकलने वाला सीवेज तालाब में मिल रहा है, जिससे जल और भूजल दोनों प्रदूषित हो रहे हैं।
प्रदूषण बोर्ड की जांच: मानकों से कई गुना अधिक मिला कोलिफॉर्म
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा फरवरी 2026 में लिए गए सैंपल में फीकल कोलिफॉर्म और टोटल कोलिफॉर्म की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई, जो साफ संकेत है कि बिना उपचारित सीवेज अब भी तालाब में डाला जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने उज्जैन के कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। एनजीटी ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त, उज्जैन को निर्देशित किया है कि तालाब पर हुए अतिक्रमण मिशन मोड में हटाए जाएं और तालाब में मिलने वाले सीवेज का प्रवाह पूरी तरह बंद करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी।
धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं ‘सप्त सागर’
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि उज्जैन के ‘सप्त सागर’ धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सिंहस्थ को देखते हुए सप्त सागरों – रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर की स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी सात सागरों के पानी की जांच कर रिपोर्ट भी एनजीटी के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव और पर्यावरण विभाग को भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।




