भोपाल (1 अप्रैल 2026): कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए भाजपा ने अपनी ‘सहयोग सेल’ को नए कलेवर में पेश किया है। अब केवल शिकायतें सुनी नहीं जाएंगी, बल्कि मंत्रियों और पदाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
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फुल-टाइम उपलब्धता: अप्रैल के पूरे माह प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों और पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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अनुशंसा पत्र अनिवार्य: जनहित के विषयों और स्थानीय समस्याओं के लिए अब जिलाध्यक्ष, विधायक या सांसद का सिफारिश पत्र (Recommendation Letter) संलग्न करना होगा, ताकि समाधान में तेजी आए।
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जमीनी जुड़ाव: जिलों में भी सांसद और विधायक निश्चित दिनों पर 2 घंटे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।
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डिजिटल अपडेट: मंत्रियों की बैठक का पूरा चार्ट सोशल मीडिया और जिला कार्यालयों के सूचना बोर्ड पर उपलब्ध रहेगा।
सहयोग सेल: कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
भाजपा प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था को अधिक ‘कार्यकर्ता केंद्रित’ बनाया गया है:
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विभाग-वार समाधान: जिस दिन जो मंत्री उपलब्ध होंगे, वे अपने विभाग और अपने प्रभार वाले जिलों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाएंगे।
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फिल्टर सिस्टम: अनुशंसा पत्र की अनिवार्यता से केवल गंभीर और वास्तविक मुद्दे ही मंत्रियों तक पहुँचेंगे, जिससे समय की बचत होगी।
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सूचना का प्रसार: मंडल और बूथ स्तर तक मंत्रियों के बैठने का समय साझा किया जाएगा ताकि दूर-दराज के कार्यकर्ताओं को भोपाल आने में परेशानी न हो।
अप्रैल का शुरुआती शेड्यूल (महत्वपूर्ण तारीखें)
महीने के पहले हफ्ते की शुरुआत इन दिग्गजों के साथ होगी:
| तारीख | उपलब्ध मंत्री | साथ में पार्टी पदाधिकारी |
| 01 अप्रैल | विश्वास सारंग, लखन पटेल | मनीषा सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष) |
| 02 अप्रैल | कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी | डॉ. प्रभुराम चौधरी (प्रदेश उपाध्यक्ष) |
पूरे महीने के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित कुल 26 मंत्री अपनी सेवाएं देंगे।
निष्कर्ष: चुनावी मोड या सुशासन?
प्रशासनिक गलियारों में इसे भाजपा की ‘डैमेज कंट्रोल’ रणनीति और ‘सुशासन’ की ओर बढ़ता कदम दोनों माना जा रहा है। मंत्रियों का जनता के बीच सीधे बैठना न केवल कार्यकर्ताओं में उत्साह भरेगा, बल्कि फाइलों में अटकी जनसमस्याओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।




