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आयुर्वेद कॉलेजों के शिक्षकों की अब खैर नहीं! छात्र मारेंगे ‘छापा’, क्लास छोड़ी तो सीधे आयोग को होगी शिकायत, नाम भी रहेगा गुप्त!

अग्रसर इंडिया न्यूज डेस्क रिपोर्टर: दीपक – भोपाल न्यूज डेस्क

सब-डिस्क्रिप्शन: भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) का ऐतिहासिक फैसला; आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा कॉलेजों के छात्र अब शिक्षकों की मनमानी और लापरवाही की कर सकेंगे गोपनीय शिकायत, संस्थान और फैकल्टी पर होगी सीधी कार्रवाई।


📌 न्यूज हाइलाइट्स:

  • छात्रों को मिली ‘पावर’: शिक्षक ने क्लास नहीं ली तो सीधे NCISM (आयोग) को रिपोर्ट कर सकेंगे विद्यार्थी।

  • पहचान रहेगी सीक्रेट: शिकायत करने वाले छात्र का नाम और जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

  • वेबसाइट पर लगाना होगा नोटिस: सभी 700+ सरकारी और निजी कॉलेजों को सूचना पटल और वेबसाइट पर आदेश अपलोड करना अनिवार्य।

  • बड़ी कार्रवाई की तैयारी: लापरवाही पाए जाने पर संबंधित फैकल्टी और कॉलेज प्रबंधन पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई।


विस्तृत समाचार:

भोपाल। देश के आयुर्वेद, यूनानी और सिद्धा कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने एक क्रांतिकारी आदेश जारी किया है। अब इन कॉलेजों के शिक्षक अपनी मर्जी से क्लास मिस नहीं कर पाएंगे। आयोग ने छात्रों को अधिकार दिया है कि यदि उनके कॉलेज में नियमित कक्षाएं नहीं लग रही हैं या कोई विशेष शिक्षक लगातार अनुपस्थित है, तो वे इसकी सीधी शिकायत आयोग से कर सकते हैं।

सोमवार को जारी हुआ फरमान आयोग के ‘मेडिकल असेसमेंट एवं रेटिंग बोर्ड’ के अध्यक्ष डॉ. मुकुल पटेल द्वारा जारी इस आदेश ने कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी शासकीय और निजी संस्थानों को यह आदेश अपने नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना होगा। इससे छात्रों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने में मदद मिलेगी।

शिकायत की गोपनीयता और नियम अक्सर छात्र इस डर से शिकायत नहीं करते कि कॉलेज प्रबंधन उन्हें प्रताड़ित कर सकता है। इस समस्या को सुलझाने के लिए NCISM ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। कॉलेजों को अब अपनी समय-सारिणी (Time-Table) की विधिवत जानकारी आयोग को पहले से देनी होगी। यदि जमीनी हकीकत टाइम-टेबल से अलग पाई जाती है, तो आयोग न केवल शिक्षक बल्कि पूरे संस्थान के खिलाफ कड़े कदम उठाएगा।

700 से अधिक कॉलेजों पर पड़ेगा असर वर्तमान में देशभर में भारतीय चिकित्सा पद्धति के 700 से अधिक कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे शिक्षा जगत में सुधार की दिशा में एक ‘माइलस्टोन’ बताया है। उनका कहना है कि इससे उन कॉलेजों पर लगाम लगेगी जो केवल कागजों पर कक्षाएं संचालित करते हैं।


निष्कर्ष:

NCISM का यह आदेश चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल छात्रों के भविष्य के साथ होने वाला खिलवाड़ रुकेगा, बल्कि कॉलेजों में पठन-पाठन का स्तर भी सुधरेगा। अब गेंद छात्रों के पाले में है कि वे इस अधिकार का उपयोग किस तरह से करते हैं।

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