भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में चल रही हाई-प्रोफाइल NSG ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा; 35 वर्षीय जांबाज कमांडो रावेंद्र भदौरिया को आया साइलेंट हार्ट अटैक, पुलिस महकमे में शोक की लहर।
📌 न्यूज हाइलाइट्स:
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ट्रेनिंग के दौरान हादसा: भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में NSG की मॉक ड्रिल के तीसरे दिन घटी घटना।
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बैरक में मिला शव: तबीयत बिगड़ने पर आराम करने गए थे कमांडो रावेंद्र, साथी जवानों ने अचेत अवस्था में पाया।
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जांबाज का करियर: 2011 बैच के कांस्टेबल थे रावेंद्र, 2013 से एसटीएफ (STF) में दे रहे थे सेवाएं।
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परिवार पर टूटा पहाड़: अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए, उदयपुरा के रहने वाले थे सोनू भदौरिया।
विस्तृत समाचार:
भोपाल। राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में सोमवार की सुबह उस वक्त मातम में बदल गई, जब आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल में शामिल एक जांबाज एसटीएफ (STF) कमांडो की हार्ट अटैक से मौत हो गई। एनएसजी (NSG) द्वारा आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण के तीसरे दिन 35 वर्षीय कमांडो रावेंद्र भदौरिया, जिन्हें प्यार से सोनू भदौरिया कहा जाता था, शहीद हो गए। अचानक हुई इस घटना ने पुलिस महकमे और उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
ट्रेनिंग के बीच बिगड़ी तबीयत, बैरक में थमी सांसें जानकारी के अनुसार, 4 अप्रैल से शुरू हुई इस मॉक ड्रिल का सोमवार को तीसरा दिन था। सुबह करीब 7:00 बजे रावेंद्र ग्राउंड पहुंचे थे और 8:00 बजे से ड्रिल शुरू हुई। करीब 9:00 बजे ट्रेनिंग के दौरान रावेंद्र को सीने में बेचैनी महसूस हुई। उन्होंने किसी को अपनी परेशानी नहीं बताई और चुपचाप कंट्रोल रूम के पीछे स्थित बैरक में आराम करने चले गए। जब काफी देर तक वे वापस नहीं लौटे, तो 10:00 बजे साथियों ने उन्हें देखने के लिए बैरक का रुख किया, जहाँ वे बेसुध पड़े मिले।
डॉक्टरों ने की हार्ट अटैक की पुष्टि रावेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और मौत का कारण ‘हार्ट अटैक’ बताया। सूचना मिलते ही अरेरा हिल्स पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद जांबाज कमांडो का पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।
2013 से एसटीएफ में थे तैनात रावेंद्र भदौरिया मूल रूप से रायसेन जिले के उदयपुरा के रहने वाले थे। वे 2011 बैच में एसएएफ (SAF) में भर्ती हुए थे और अपनी कार्यकुशलता के चलते 2013 में विशेष कार्य बल (STF) में पदस्थ हुए। उन्होंने कमांडो की कठिन ट्रेनिंग भी पूरी की थी और वर्तमान में नेहरू नगर पुलिस लाइन में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनके निधन से एक बेटा और एक बेटी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
निष्कर्ष:
कठिन ट्रेनिंग और हाई-रिस्क ऑपरेशंस के लिए तैयार रहने वाले कमांडो का इस तरह अचानक चले जाना सिस्टम और स्वास्थ्य प्रबंधन पर भी सवाल खड़े करता है। एनएसजी की इस ड्रिल में आतंकवादियों से निपटने के वास्तविक प्रदर्शन किए जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पुलिस विभाग ने शहीद जवान के परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।




