मध्य प्रदेश एसटीएसएफ ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया। बांग्लादेशी सरगना रेमंड तालुकदार के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कार्नर नोटिस जार …और पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करने में मिली बड़ी सफलता।
HighLights
- मुरैना में घड़ियाल और दुर्लभ कछुओं की तस्करी पकड़ी गई।
- बांग्लादेशी तस्कर रेमंड तालुकदार के खिलाफ रेड नोटिस जारी।
- वन्यजीवों की तस्करी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों तक की जाती थी।
भोपाल। मध्य प्रदेश वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने दुर्लभ जलीय वन्यजीवों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है।
एसटीएसएफ की जांच और जुटाए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर इंटरपोल ने बांग्लादेश के वन्यजीव तस्कर अल हज शफीकुल इस्लाम रहमान तालुकदार उर्फ रेमंड तालुकदार के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया है। वन्यजीव अपराधों के खिलाफ यह कार्रवाई मध्य प्रदेश की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मुरैना में पकड़े गए दुर्लभ जलीय वन्यजीव
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने जुलाई 2025 में मुरैना जिले में कार्रवाई करते हुए घड़ियाल के 30 बच्चे, 17 रेड-क्राउंड रूफ्ड टर्टल और 19 थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल बरामद किए थे। मामले में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह दुर्लभ जलीय वन्यजीवों की तस्करी कर उन्हें पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजता था। वहां से इन वन्यजीवों को म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में सप्लाई किया जाता था।
छह आरोपित गिरफ्तार
एसटीएसएफ ने अन्य राज्यों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की और अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मार्च 2026 में देश के बड़े जलीय वन्यजीव तस्करों में शामिल तारकनाथ घोष को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया था। पूछताछ, डिजिटल इनपुट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सरगना के रूप में बांग्लादेश निवासी तालुकदार की भूमिका सामने आई।
इंटरपोल ने जारी किया रेड कार्नर नोटिस
- एसटीएसएफ ने एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट हासिल किया। इसके बाद केंद्र सरकार के माध्यम से इंटरपोल से संपर्क किया गया। इंटरपोल ने 29 अप्रैल 2026 को तालुकदार के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कर दिया। इस पूरी कार्रवाई में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नई दिल्ली का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
- वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है और इससे दुर्लभ प्रजातियों की तस्करी रोकने में मदद मिलेगी।




