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AIIMS भोपाल में इफ्तार पर बवाल: बजरंग दल ने गंगाजल से किया ‘शुद्धिकरण’; हनुमान चालीसा का पाठ कर दी चेतावनी

भोपाल: राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स (AIIMS) भोपाल में हाल ही में आयोजित किए गए ‘रोजा इफ्तार’ कार्यक्रम पर विवाद खड़ा हो गया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को संस्थान की गरिमा और नियमों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने परिसर को “अपवित्र” होने का दावा करते हुए वहाँ गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किया।

प्रमुख बिंदु (HighLights):

  • परिसर में शुद्धिकरण: बजरंग दल के सदस्यों ने गंगाजल छिड़ककर परिसर को पवित्र करने का दावा किया।

  • सामूहिक हनुमान चालीसा: एम्स परिसर के बाहर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ किया।

  • अधिकारियों पर निशाना: संबंधित विभाग के एचडीओ (HDO) को तत्काल पद से हटाने की मांग की गई।

  • प्रशासन को चेतावनी: भविष्य में ऐसे किसी भी आयोजन की अनुमति न देने की सख्त हिदायत।


क्यों भड़का विवाद?

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एम्स जैसे सरकारी और संवेदनशील चिकित्सा संस्थान के भीतर किसी विशेष धार्मिक आयोजन (इफ्तार) की अनुमति देना गलत है।

  1. धार्मिक निष्पक्षता: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि अस्पताल परिसर केवल इलाज और शिक्षा के लिए होना चाहिए, न कि धार्मिक गतिविधियों के लिए।

  2. नारेबाजी और प्रदर्शन: विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।


शुद्धिकरण और हनुमान चालीसा का पाठ

विरोध के प्रतीक के रूप में, बजरंग दल के सदस्यों ने उस स्थान पर गंगाजल छिड़का जहाँ इफ्तार का आयोजन हुआ था। इसके बाद, संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि कोई अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

प्रशासन से मांग: HDO को हटाओ

संगठन ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि जिस अधिकारी (HDO) ने इस आयोजन की अनुमति दी या इसे आयोजित करवाया, उसे तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।


निष्कर्ष: शिक्षण संस्थानों में धार्मिक आयोजन पर छिड़ी बहस

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों में धार्मिक आयोजनों की मर्यादा पर बहस छेड़ दी है। एम्स प्रशासन की ओर से फिलहाल इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन शहर में इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

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