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भोपाल के चंदनपुरा सिटी फॉरेस्ट में फिर दिखा बाघ; फार्महाउस में घुसते ही रिकॉर्ड हुआ वीडियो, कॉरिडोर में बढ़ते निर्माण और इंसानी दखल से बढ़ा खतरा

 

शुक्रवार सुबह चंदनपुरा सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र के पास बाघ की दहाड़ सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर जाता दि…और पढ़ें

भोपाल के चंदनपुरा सिटी फॉरेस्ट में फिर दिखा बाघ; फार्महाउस में घुसते ही रिकॉर्ड हुआ वीडियो, कॉरिडोर में बढ़ते निर्माण और इंसानी दखल से बढ़ा खतरा

भोपाल में जागरण कॉलेज के पास दिखा बाघ।

HighLights

  1. शुक्रवार सुबह चंदनपुरा सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र के पास बाघ की दहाड़ सुनाई दी
  2. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर जाता दिखा
  3. क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक, निर्माण कार्यों के कारण इंसानों और वन्यजीवों का हो रहा संघर्ष

भोपाल । राजधानी के चंदनपुरा सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र के पास एक बार फिर बाघ की मौजूदगी सामने आने से लोगों में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब सात बजे के बाघ की दहाड़ सुनाई दी और उसे क्षेत्र में देखा भी गया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाघ पास के एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के अंदर जाता दिखाई दिया। घटना का वीडियो भी स्थानीय लोगों ने रिकार्ड किया है।

पहले भी आ चुका है बाघ

क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय से बाघों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। दूसरी ओर, मॉर्निंग वॉक, निजी गतिविधियों और आसपास बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण लोगों की मौजूदगी भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में वन्यजीव और इंसानों के आमने-सामने आने का खतरा बढ़ रहा है।

वन्यजीवों के क्षेत्र में इंसानों की घुसपैठ

विशेषज्ञ मानते हैं कि बाघ सामान्य रूप से इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन जब उनके प्राकृतिक आवागमन मार्ग यानी कॉरिडोर में सड़कें, निजी निर्माण और भूमि विकास बढ़ने लगते हैं तो उनका रास्ता प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में बाघ आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे दुर्घटना, हमले या वन्यजीवों के घायल होने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चिंता जताई जा रही है कि क्षेत्र में वन विभाग की स्थायी चौकी नहीं होने से निगरानी और त्वरित कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।

लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को गंभीर होने से पहले नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर की पहचान और संरक्षण, संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की समीक्षा, वन विभाग की नियमित निगरानी, चेतावनी बोर्ड, गश्त बढ़ाने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। इससे बाघ और इंसानों-दोनों की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।

 

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