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भोपाल के इस कैंपस ने 60 सालों में बदली देश की शिक्षा की तस्वीर, तैयार किए जा रहे हैं नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के ‘मास्टर ट्रेनर्स’

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

शिक्षा के गढ़ के रूप में भोपाल की पहचान: पिछले 6 दशकों से शिक्षकों को गढ़ रहा है आरआईई (RIE), आधुनिक तकनीक और शोध का बन चुका है प्रमुख केंद्र

भोपाल: शिक्षा की नींव मजबूत करने में शिक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है और एक बेहतर टीचिंग स्टाइल ही भविष्य के भारत का निर्माण करती है। राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE) पिछले छह दशकों से देश और मध्य भारत में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने, नई रिसर्च करने और शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचार अपनाने का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 100 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला यह संस्थान आज देश की आधुनिक शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • स्थापना और कार्यक्षेत्र: RIE भोपाल की शुरुआत वर्ष 1963 में हुई थी, जिसे 1995 में पुनर्गठित कर वर्तमान स्वरूप दिया गया। यह संस्थान मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, और दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव जैसे पश्चिमी व मध्य क्षेत्रों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है।

  • अत्याधुनिक कैंपस सुविधाएं: श्यामला हिल्स पर स्थित इस विशाल परिसर में सेंट्रल लाइब्रेरी, अत्याधुनिक साइंस और मैथ्स लैब, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी लैब, हॉस्टल, खेल के मैदान, इंडोर स्पोर्ट्स सेंटर, जिम और एक बड़ा मल्टीपर्पस हॉल जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।

  • विविध शैक्षणिक पाठ्यक्रम: यहाँ केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि 4 साल के इंटीग्रेटेड B.Sc-B.Ed और B.A-B.Ed, 2 साल के B.Ed और M.Ed, 3 साल के B.Ed-M.Ed, गाइडेंस और काउंसलिंग में डिप्लोमा, तथा एजुकेशन में Ph.D जैसे कई प्रतिष्ठित कोर्स संचालित किए जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 4 साल के इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम को बढ़ावा देने में इस संस्थान की अग्रणी भूमिका रही है।

नवाचार, तकनीक और ‘डीएमएस’ (DMS) की भूमिका

  • AI और डिजिटल तकनीक का प्रशिक्षण: RIE भोपाल केवल नए शिक्षकों को तैयार नहीं करता, बल्कि सेवारत (in-service) शिक्षकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स और वर्कशॉप आयोजित करता है। शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टूल्स, स्मार्ट क्लास प्रबंधन, और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

  • डीएमएस (DMS) – शिक्षकों की ‘लाइव लैब’: कैंपस के भीतर संचालित ‘डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल’ (DMS) भावी शिक्षकों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला की तरह है। सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध यह स्कूल शिक्षण के नए तौर-तरीकों, टीएलएम (TLM) और प्रैक्टिकल टीचिंग के अभ्यास के लिए एक आदर्श मॉडल माना जाता है।

  • पाठ्यक्रम और नीति निर्माण में योगदान: आरआईई भोपाल केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एससीईआरटी (SCERT) और डीआईईटी (DIET) के साथ मिलकर सिलेबस में सुधार, नई पुस्तकों के निर्माण और नीतिगत अनुसंधान में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

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