एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
केरवा-कलियासोत एफटीएल मामला: एनजीटी में पेश हुई ड्रोन सर्वे रिपोर्ट, कलियासोत के दायरे में मिले अवैध रेस्टोरेंट और डेयरियां; केरवा में पानी बहाए जाने पर जताई गई आपत्ति
भोपाल: राजधानी के प्रमुख जल स्रोतों—केरवा और कलियासोत डैम—के फुल टैंक लेवल (FTL) की वास्तविक सीमा तय करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर किए गए ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग की रिपोर्ट मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) द्वारा एनजीटी में प्रस्तुत कर दी गई है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद कलियासोत क्षेत्र में एफटीएल के दायरे में हुए बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों का खुलासा हुआ है, वहीं केरवा डैम में पानी बहाए जाने को लेकर एनजीटी में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कलियासोत एफटीएल के दायरे में अवैध निर्माण: ड्रोन सर्वे के दौरान कलियासोत में एफटीएल के 50 मीटर दायरे के भीतर कई पक्के निर्माण, डेयरियां, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सामने आई हैं। फिश फार्म क्षेत्र में एफटीएल से महज 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण और डेरी मिली है, इसके अलावा जलभराव क्षेत्र के भीतर सड़क निर्माण व प्लॉटिंग के लिए मुनारें गाड़े जाने के साक्ष्य भी दर्ज किए गए हैं।
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केरवा डैम में पानी बहाने पर आपत्ति: केरवा डैम में नए पुल का निर्माण कार्य चलने की वजह से पानी बह रहा है, जिसके कारण एफटीएल तक पानी न पहुंच पाने से वास्तविक सीमा का मौके पर मिलान नहीं हो सका। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच के समक्ष फोटो और वीडियो पेश कर आपत्ति जताई कि जानबूझकर पेयजल के लिए आरक्षित पानी बहाया जा रहा है, जिससे भविष्य में भोपाल के कई इलाकों में गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।
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एनजीटी के सख्त निर्देश: मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने आगामी 15 दिन के भीतर केरवा में पानी के बहाव को रोकने के प्रभावी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने स्पष्ट किया है कि केरवा की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।




