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भोपाल में ठग ने फोन-पे हिस्ट्री दिखाने के बहाने रिटायर्ड अधिकारी के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये, केस दर्ज

 

भोपाल के कजलीखेड़ा क्षेत्र में साइबर जालसाजों ने एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को निशाना बनाकर करीब दो लाख रुपये की ठगी कर ली। इसी दौरान शातिर ठग ने उनके …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 24 May 2026 01:15:01 PM (IST)Updated Date: Sun, 24 May 2026 01:15:01 PM (IST)

भोपाल में ठग ने फोन-पे हिस्ट्री दिखाने के बहाने रिटायर्ड अधिकारी के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये, केस दर्ज

ठग ने रिटायर्ड अधिकारी के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. रिटायर्ड अधिकारी के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये
  2. साइबर ठग ने पहले अधिकारी को तीन हजार रुपये भेजे
  3. मामले में कजलीखेड़ा पुलिस ने केस दर्ज किया है

भोपाल। कजलीखेड़ा क्षेत्र में साइबर जालसाजों ने एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को निशाना बनाकर करीब दो लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपित ने पहले फरियादी के खाते में तीन हजार रुपये ट्रांसफर किए और फिर रकम वापस लेने के बहाने फोन-पे हिस्ट्री चेक कराई। इसी दौरान शातिर ठग ने उनके बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए बड़ी रकम निकाल ली। कजलीखेड़ा पुलिस ने केस दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार यूबी सिटी, कजलीखेड़ा निवासी 64 वर्षीय कुंदन सिंह फणसे कृषि विभाग से सब आडिटर पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने शिकायत में बताया कि 18 मई की शाम उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने कहा कि गलती से उसके तीन हजार रुपये उनके खाते में ट्रांसफर हो गए हैं और वह रकम वापस चाहता है। फरियादी ने पहले बैंक जाकर पुष्टि करने की बात कही, लेकिन आरोपित ने उन्हें फोन-पे की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री देखने के लिए कहा।

 

कुंदन सिंह को डिजिटल पेमेंट ऐप की अधिक जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपनी बहू से हिस्ट्री चेक करना सीखा। जब उन्होंने फोन-पे हिस्ट्री देखी तो खाते में तीन हजार रुपये जमा होना दिखाई दिया, लेकिन साथ ही कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन भी सामने आए। जांच करने पर पता चला कि 15 और 16 मई के बीच उनके खाते से 1200 रुपये, 96 हजार 80 रुपये और एक लाख रुपये सहित कुल 1 लाख 97 हजार 280 रुपये निकाले जा चुके थे।

इसके बाद फरियादी ने भारतीय स्टेट बैंक की पुराना सचिवालय शाखा पहुंचकर पासबुक अपडेट कराई और पूरी ठगी का खुलासा हुआ। मामले की शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जीरो एफआईआर कजलीखेड़ा थाने भेजी गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

 

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