अस्पताल में मरीजों की सेवा करने वाले डॉ. रोहित दुबेपुरिया और डॉ. प्रकृति सिसोदिया की पांच माह की लाडली काशी इस समय एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है। …और पढ़ें

डॉक्टर दंपति की नन्ही जान पर आया बड़ा संकट।
भोपाल। दूसरों का जीवन बचाने वाले एम्स भोपाल के डॉक्टर दंपती आज खुद नियति के आगे बेबस खड़े हैं। अस्पताल में मरीजों की सेवा करने वाले डॉ. रोहित दुबेपुरिया और डॉ. प्रकृति सिसोदिया की पांच माह की लाडली काशी इस समय एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, जिसका इलाज किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए आसान नहीं है। काशी को ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए टाइप-1) नामक जेनेटिक बीमारी है, जिसके उपचार के लिए लगने वाले ‘जोल्गेन्स्मा’ इंजेक्शन की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये है।
जन्म के बाद सामने आए लक्षण और घातक रिपोर्ट
काशी के जन्म के बाद माता-पिता ने गौर किया कि उसकी गर्दन में असामान्य लचीलापन है और उसके हाथ-पैरों की गति भी बहुत कम है। मासूम को दूध पीने और सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी। जब एम्स भोपाल में जांच कराई गई, तो रिपोर्ट ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।
काशी एसएमए टाइप-1 से पीड़ित पाई गई, जो इस बीमारी की सबसे घातक श्रेणी है। इसमें मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं, जिससे जीवन पर संकट मंडराने लगता है।
उज्जैन से शुरू हुई मुहिम
नन्ही काशी को नया जीवन देने के लिए उज्जैन के सामाजिक संगठनों ने ‘नन्ही काशी’ अभियान शुरू किया है। हाल ही में हारमोनियम बिट्स और हम परिवार संस्थाओं ने टावर चौक पर चैरिटी शो के जरिए फंड जुटाने की भावनात्मक शुरुआत की है। अब इस मुहिम को भोपाल के जन-सहयोग की दरकार है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक जीन थेरेपी है। इसमें शरीर में उस खराब जीन को बदला जाता है जो मांसपेशियों को ताकत देता है। दुनिया का सबसे महंगा कहा जाने वाला यह इंजेक्शन ही काशी को सामान्य जीवन दे सकता है। मध्य प्रदेश में इससे पहले मंदसौर की सृष्टि और इंदौर की अनिका के लिए भी इसी तरह के व्यापक अभियान चलाए जा चुके हैं।




