स्वास्थ्य · मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के सरकारी आयुष अस्पतालों और औषधालयों में आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवाओं की खरीद का तरीका अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। जो काम पहले अलग-अलग एजेंसियां करती थीं, वह अब एक ही छत के नीचे — एमपी पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन (MPPHSCL) के हाथ में आ गया है।
यह बदलाव छोटा नहीं है। बरसों से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था टूट रही है, जिसमें दवाएं समय पर न मिलना आम बात थी — और मरीज़ खाली हाथ लौटते थे।
पहले क्या होता था?
अब तक आयुर्वेदिक दवाओं की आपूर्ति का जिम्मा मुख्य रूप से मप्र लघु वनोपज संघ के पास था। होम्योपैथिक दवाओं के लिए हर बार ओपन टेंडर निकाला जाता था। इस प्रक्रिया में अक्सर इतना वक्त लग जाता था कि पुराना अनुबंध खत्म हो जाता और नई सप्लाई शुरू होने में महीनों की देरी हो जाती।
नतीजा यह होता था कि जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं “आउट ऑफ स्टॉक” हो जाती थीं। डॉक्टर पर्चा लिखते, लेकिन दवा मिलती नहीं थी। आयुष के मरीज — जो अक्सर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके से होते हैं — सबसे ज़्यादा इसकी मार झेलते थे।
अब क्या बदलेगा?
MPPHSCL ने पहली बार आयुर्वेदिक कच्ची औषधियों, यूनानी और होम्योपैथिक दवाओं के लिए रेट कॉन्ट्रैक्ट जारी किए हैं। यानी सप्लायर्स से पहले ही तय दाम पर अनुबंध हो गया है — जब जरूरत हो, तुरंत ऑर्डर दे सकते हैं।
| श्रेणी | दवाएं / विवरण |
|---|---|
| आयुर्वेद | अश्वगंधा, ब्राह्मी, अर्जुन छाल, आमगिरी जैसी कच्ची औषधियां |
| होम्योपैथी | 30, 200 और 1M पोटेंसी की डाइल्यूशन दवाएं |
| प्रक्रिया | ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए सीधी खरीद |
यह बदलाव क्यों अहम है?
अब तक MPPHSCL सिर्फ एलोपैथिक दवाओं की खरीद करता था। आयुष को उसी आधुनिक सप्लाई चेन से जोड़ना — जहां बड़े और प्रतिष्ठित सप्लायर्स के साथ सीधा अनुबंध होता है — इसका मतलब है दवाओं की गुणवत्ता में सुधार, प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की गुंजाइश में कमी।
ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए खरीदी होने से हर लेनदेन का रिकॉर्ड रहेगा। कौन सी दवा कहां गई, कितनी मात्रा में गई — यह सब ट्रैक होगा। यह एक छोटा-सा बदलाव नहीं, बल्कि आयुष व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है।
अब देखना यह है कि यह नई व्यवस्था ज़मीन पर कितनी असरदार साबित होती है — और क्या सालों से खाली पड़ी अलमारियां आखिरकार भर पाएंगी।




