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कभी अंग्रेजों ने बनाई थी भारतीय पुलिस, अब MP पुलिस से ‘सामुदायिक पुलिसिंग’ का पाठ सीख रही ब्रिटेन की पुलिस

 

कभी ब्रिटिश शासन ने भारत में आधुनिक पुलिस व्यवस्था की नींव रखी थी। अब समय ने दिलचस्प करवट बदली है। बदलाव यह है कि ब्रिटेन की पुलिस भारत की सामुदायिक प…और पढ़ें

कभी अंग्रेजों ने बनाई थी भारतीय पुलिस, अब MP पुलिस से 'सामुदायिक पुलिसिंग' का पाठ सीख रही ब्रिटेन की पुलिस

ब्रिटेन से आए प्रोफेसर रुवन परेरा व अन्य।

HighLights

  1. डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी और लंदन पुलिस के पूर्व अधिकारी की टीम मध्यप्रदेश के दौरे पर
  2. भोपाल में जनसंवाद और डायल-112 जैसे मॉडल पर अध्ययन, अपनाएगी ब्रिटिश पुलिस
  3. अध्ययन दल का नेतृत्व लंदन पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी रुवन परेरा कर रहे हैं

भोपाल। कभी ब्रिटिश शासन ने भारत में आधुनिक पुलिस व्यवस्था की नींव रखी थी। अब समय ने दिलचस्प करवट बदली है। बदलाव यह है कि ब्रिटेन की पुलिस भारत की सामुदायिक पुलिसिंग प्रणाली को समझने और उससे सीखने के लिए मध्यप्रदेश पहुंची है। ब्रिटेन के डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी की पुलिस स्टडीज टीम और लंदन पुलिस के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने तीन दिन भोपाल में रहकर मध्यप्रदेश पुलिस की उन पहलकदमियों का अध्ययन किया, जिनका उद्देश्य पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास तथा सहभागिता को मजबूत करना है।

दल का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर रुवन परेरा

अध्ययन के आधार पर ब्रिटेन की सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप इन मॉडलों को विकसित करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। अध्ययन दल का नेतृत्व लंदन पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी में पुलिसिंग स्टडीज के प्रोफेसर रुवन परेरा कर रहे हैं। उनके साथ विश्वविद्यालय का एक शोधार्थी भी आया है। 22 से 24 जुलाई तक भोपाल प्रवास के दौरान टीम ने मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग से जुड़ी जनसंवाद, नगर सुरक्षा समिति, शांति समिति, ऊर्जा डेस्क, ”सृजन” कार्यक्रम और डायल-112 की कार्यप्रणाली का विस्तृत अध्ययन किया। इसके बाद दल देवास पहुंचा, जहां जन-चौपाल जैसे स्थानीय मॉडलों का अवलोकन किया जा रहा है।

 

यूरोप की बदलती सामाजिक परिस्थितियों पर शोध

प्रोफेसर रुवन परेरा के अनुसार ब्रिटेन सहित यूरोप के कई देशों में सामाजिक संरचना तेजी से बदल रही है। विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों के बसने से पुलिस के सामने सामाजिक समन्वय, सामुदायिक विश्वास और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। भारत लंबे समय से बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक समाज रहा है। ऐसे में यहां विकसित सामुदायिक पुलिसिंग के मॉडल इन चुनौतियों से निपटने में उपयोगी हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश के अनुभवों का अध्ययन किया जा रहा है।

इन पहलों ने खींचा ध्यान

भोपाल में अध्ययन के दौरान टीम ने जनसंवाद कार्यक्रम की कार्यप्रणाली देखी, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सीधे नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान सुनिश्चित करते हैं। नगर सुरक्षा समिति के माध्यम से स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था में भागीदारी और शांति समिति के जरिए विभिन्न समुदायों के बीच संवाद एवं सौहार्द बनाए रखने की व्यवस्था का भी अध्ययन किया गया।

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