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भोपाल / विशेष डेस्क
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस विशेष: 71 साल का हुआ ‘दिलों का प्रदेश’; तीन बड़े शहरों की खींचतान के बाद ऐसे भोपाल बना था एमपी की राजधानी
भोपाल: अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध कला और अनूठी संस्कृति के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखने वाला मध्य प्रदेश आज (1 नवंबर 2026 को) अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। देश के बिल्कुल मध्य में स्थित होने के कारण इसे ‘भारत का हृदय प्रदेश’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां पूरे भारत की संस्कृति की एक खूबसूरत झलक देखने को मिलती है। आज के इस खास मौके पर आइए जानते हैं कि कैसे तमाम भौगोलिक और राजनीतिक मंथन के बाद मध्य प्रदेश का यह मौजूदा स्वरूप अस्तित्व में आया और कैसे तमाम दावों के बीच भोपाल को राज्य की राजधानी चुना गया।
ब्रिटिश काल और पुनर्गठन की कहानी
स्वतंत्रता से पहले और गठन के शुरुआती दौर में मध्य प्रदेश का यह क्षेत्र ‘सेंट्रल इंडिया’ के नाम से जाना जाता था और ब्रिटिश शासनकाल में यह मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ था:
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पार्ट ‘ए’, पार्ट ‘बी’ और पार्ट ‘सी’: उस दौर में रियासतों और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इन तीनों भागों की अलग-अलग राजधानियां हुआ करती थीं, और भोपाल में नवाबों का शासन था।
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ढाई साल का लंबा मंथन: देश की आजादी के बाद राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। पंडित रविशंकर शुक्ल के नेतृत्व में कुशल नेताओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें ग्वालियर, महाकौशल (कौशल), चंबल और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर एक बड़ा राज्य बनाने पर विचार हुआ।
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राज्य के पुनर्गठन की यह जिम्मेदारी द्वारका प्रसाद मिश्र और घनश्याम सिंह गुप्ता को सौंपी गई। लगभग ढाई साल तक चले विचार-विमर्श और मंथन के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश के गठन की रूपरेखा तैयार हुई।
राजधानी की रेस में ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर को पीछे छोड़ कैसे बना भोपाल?
जब मध्य प्रदेश का गठन तय हुआ, तब राजधानी को लेकर सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल सामने आया। उस समय ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर बड़े और आर्थिक रूप से संपन्न शहर थे, और इन तीनों ही शहरों के नेता चाहते थे कि उनके शहर को ही नए राज्य की राजधानी बनाया जाए।
राजधानी की इस खींचतान के बीच तत्कालीन समय में एक नया नाम सामने आया — भोपाल।
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डॉ. शंकर दयाल शर्मा चाहते थे कि मध्य प्रदेश के बिल्कुल भौगोलिक केंद्र में स्थित भोपाल को ही राज्य की राजधानी का दर्जा दिया जाए।
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उन्होंने अपना यह प्रस्ताव देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सामने रखा।
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पंडित नेहरू को यह प्रस्ताव तर्कसंगत और व्यावहारिक लगा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसके बाद से लेकर आज तक भोपाल ही मध्य प्रदेश की शान के साथ इसकी राजधानी बना हुआ है।
विकास के नए आयाम तय करता आज का मध्य प्रदेश
समय के साथ प्रशासनिक और भौगोलिक बदलावों से गुजरते हुए आज मध्य प्रदेश में कुल 55 जिले, 230 विधानसभा सीटें और 29 लोकसभा सीटें हैं। अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता को संजोए हुए यह राज्य पिछले 71 वर्षों में विकास के नए आयाम तय कर रहा है।




