एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारियां शुरू: कैग की आपत्तियों के बाद वित्त विभाग सख्त, अब तीन स्तरों पर होगी बजट प्रस्तावों की जांच
भोपाल: मध्य प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 का बजट तैयार करने की प्रशासनिक प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। आगामी 9 सितंबर से विभिन्न विभागों के साथ बजट को लेकर महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू हो जाएगा। इस बार वित्त प्रबंधन को अधिक दुरुस्त और वास्तविक बनाने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से आय और व्यय के अनुमानों में आ रहे भारी अंतर और कैग (CAG) की आपत्तियों के बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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तीन चरणों में होगी बजट प्रस्तावों की जांच: बजट तैयार करने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुमानों के असंतुलन से बचने के लिए इस बार प्रस्तावों का परीक्षण तीन चरणों में किया जाएगा।
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प्रथम चरण: अपर सचिव और उपसचिव स्तर के अधिकारी विभागों के बजट प्रस्तावों की शुरुआती जांच करेंगे।
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द्वितीय चरण: इसके बाद सचिव स्तर पर प्रस्तावों को परखा जाएगा।
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तृतीय चरण: अंत में संबंधित मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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बजट अनुमानों और वास्तविकता में भारी अंतर: हर साल आय का अनुमान गड़बड़ा जाने से पूरे वित्त प्रबंधन पर असर पड़ता है और विभागों के बजट में कटौती करनी पड़ती है, जिससे विकास कार्यों के लक्ष्य प्रभावित होते हैं। कैग भी अपनी रिपोर्ट में इस पर गहरी आपत्ति जता चुका है।
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आंकड़ों की बानगी:
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वर्ष 2024-25 में अनुमानित बजट 3,65,067 करोड़ रुपये प्रस्तुत किया गया था, जबकि पुनरीक्षित वास्तविक राशि 3,55,886 करोड़ रुपये रही।
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इसी तरह, 2026-27 के बजट के दौरान जब बीत रहे वर्ष का पुनरीक्षित बजट सामने आया, तो अनुमानित और वास्तविक राशि में लगभग 65,146 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर देखने को मिला।
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कैग की रिपोर्ट और पिछली खामियां
नियंत्रक महालेखापरीक्षक (CAG) ने वर्ष 2025 में विधानसभा में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में राज्य के वित्त पर गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि विभागों द्वारा जो अनुमान लगाए जाते हैं, वे वास्तविकता से कोसों दूर होते हैं।
वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, विभागों के गलत अनुमानों के कारण 67,926 करोड़ रुपये की बचत (बजट का उपयोग न हो पाना) की स्थिति बनी, वहीं 57,983 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रावधानों में से 29,098 करोड़ रुपये पूरी तरह अनुपयोगी रहे। इन तमाम कमियों को दूर करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए ही वित्त विभाग ने इस बार बजट प्रक्रिया को त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र से लैस किया है।




