एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश पर मंडराया ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ का खतरा: 2030 तक 2 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान; TERI और IGSD की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
भोपाल: देश के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश पर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’ (TERI) और ‘इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (IGSD) के एक संयुक्त अध्ययन में चौंकाने वाली चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक राज्य में दिन के तापमान में 1.8 से 2 डिग्री सेल्सियस और रात के तापमान में 2 से 2.4 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। पूर्वी अंचल के जिले (जैसे डिंडोरी, भिंड और सीधी) इस तपिश के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील बताए गए हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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प्रदूषण और मीथेन उत्सर्जन के मुख्य केंद्र: भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे महानगरों में वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और कचरे के ढेर प्रदूषण व मीथेन के प्रमुख कारक हैं। हालांकि इंदौर ने कार्बन क्रेडिट के जरिए 1.70 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बदले 50 लाख रुपये की कमाई कर एक मिसाल कायम की है, फिर भी वह कचरे से निकलने वाली मीथेन के बड़े हॉटस्पॉट में शामिल है।
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पशुपालन और मीथेन: राज्य में कुल उत्सर्जित मीथेन गैस का 60% हिस्सा अकेले पशुपालन क्षेत्र से आता है। सागर, मुरैना, रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा जिले पशुधन आधारित मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किए गए हैं।
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वायु प्रदूषण के अन्य बड़े कारक:
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पराली और ब्लैक कार्बन: फसल अवशेष जलाने से 47% ब्लैक कार्बन निकलता है, जो हवा में PM 2.5 और PM 10 का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ाता है।
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नाइट्रोजन ऑक्साइड: राज्य में निकलने वाले कुल नाइट्रोजन ऑक्साइड का 92% हिस्सा बिजली संयंत्रों (थर्मल पावर प्लांट्स) और वाहनों की आवाजाही से बनता है।
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घरेलू प्रदूषण: ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में लकड़ी और जैव ईंधन पर खाना पकाने के कारण 49% गैसीय प्रदूषक घरों के अंदर उत्पन्न होते हैं।
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बचाव और समाधान की रणनीतिक सिफारिशें
वैज्ञानिक और शोध रिपोर्ट में इस संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाए गए हैं:
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कृषि और पशुपालन में सुधार: धान की खेती में निश्चित अंतराल पर पानी देने की तकनीक (AWD) अपनाने से 65% तक मीथेन घटाई जा सकती है, जबकि बेहतर पशु आहार के उपयोग से 10-15% तक मीथेन उत्सर्जन कम हो सकता है।
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परिवहन और ऊर्जा: प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना और पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना जरूरी है। नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने से नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में भारी कटौती संभव है।
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अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management): गीले कचरे से बायोगैस का निर्माण और हर घर में एलपीजी या सौर चूल्हों का दायरा बढ़ाकर घरेलू वायु प्रदूषण को 80% तक कम किया जा सकता है।




