एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक डेस्क
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बड़ा वेतन घोटाला: आउटसोर्स कर्मचारियों के हक के 55 करोड़ रुपये डकार रही हैं कंपनियां, 16 जिलों की पड़ताल में हुआ खुलासा
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन के नाम पर एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में करीब 10,000 कर्मचारी 10 से 12 घंटे तक कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके तय वेतन का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। विभिन्न आउटसोर्स कंपनियों द्वारा हर महीने औसतन 4.58 करोड़ रुपये और साल भर में लगभग 55 करोड़ रुपये की अवैध कटौती किए जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
सरकारी नियमों की अनदेखी और कंपनियों का खेल: शासन द्वारा अर्द्ध-कुशल श्रमिक दर के तहत प्रति कर्मचारी 13,571 रुपये भुगतान किया जाता है, लेकिन धरातल पर कर्मचारियों को महज 5,500 से 11,700 रुपये ही थमाए जा रहे हैं। ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) के नाम पर फर्जी कटौतियां दिखाकर यह पूरा खेल खेला जा रहा है।
-
सक्रिय प्रमुख कंपनियां: प्रदेश में राज सिक्योरिटी फोर्स, कामथेन सिक्योरिटी इंदौर, स्काई बुल सिक्योरिटी के अलावा ओरियन, ईगल और क्रिस्टल जैसी करीब 25 छोटी-बड़ी आउटसोर्स कंपनियां एनआरसी (NRC), एसएनसीयू (SNCU) और डीईआईसी (DEIC) जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में स्टाफ मुहैया करा रही हैं। राज सिक्योरिटी फोर्स के पास भोपाल, सीहोर, भिंड, राजगढ़, मुरैना, रायसेन, विदिशा और नरसिंहपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा टेंडर हैं।
-
16 जिलों के वेतन आंकड़ों की सच्चाई: नईदुनिया की पड़ताल में जब 16 जिलों के कर्मचारियों की सैलरी स्लिप खंगाली गई, तो हर जगह नियमों की धज्जियां उड़ती पाई गईं:
-
कटनी: राज कुमारी को मात्र 5,500 रुपये
-
मैहर: शबनम खान को 7,033 रुपये
-
अलीराजपुर: राकेश डोडवा को 7,436 रुपये
-
विदिशा: हेमा नायर को 7,500 रुपये
-
उज्जैन: संगीता राठौर को 7,650 रुपये
-
मुरैना: रवि सोलंकी को 8,043 रुपये
-
सागर: अम्बिका रैकवार को 8,000 रुपये
-
नरसिंहपुर: रजनी राजपूत को 8,806 रुपये
-
खरगोन: सुकन्या को 9,000 रुपये
-
(इसके अलावा भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन और अनूपपुर में भी निर्धारित दर से काफी कम भुगतान किया जा रहा है)।
-
-
सालाना 55 करोड़ का गबन: इन 16 मामलों में औसत कटौती करीब 4,581 रुपये प्रति कर्मचारी है। इसी अनुपात से प्रदेश के 10 हजार कर्मचारियों का यह घोटाला सालाना लगभग 54.98 करोड़ रुपये यानी करीब 55 करोड़ रुपये बैठता है। कटनी जैसे मामलों को आधार बनाया जाए तो यह आंकड़ा 96 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंच सकता है।
-
8 साल से चल रहा है शोषण: मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह का कहना है कि यह आर्थिक शोषण पिछले 8 वर्षों से लगातार जारी है। आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। सीएम हेल्पलाइन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक किसी भी दोषी कंपनी पर ठोस कार्रवाई या ब्लैक लिस्टिंग की कार्रवाई नहीं हुई है।
-
एम्स भोपाल में भी हो चुका है विरोध: हाल ही में एम्स भोपाल में एमजे आउटसोर्स कंपनी द्वारा एक साथ 260 कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद करीब 500 कर्मचारियों ने दिन-रात प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रबंधन को झुकना पड़ा था और सभी को वापस रखना पड़ा था।




