एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला: गोविंदपुरा इलाके में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर महिला से 35 लाख रुपये की ठगी, पुलिस अधिकारी बनकर बनाया था निशाना
भोपाल: राजधानी के गोविंदपुरा इलाके में साइबर ठगों द्वारा ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और उसके बैंक खाते में आतंकवादियों द्वारा करोड़ों रुपये जमा होने का झूठा डर दिखाया। आरोपियों ने महिला को बच्चों को जेल भेजने की धमकी देकर मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उसने अपनी एफडी तुड़वाने और उधार लेकर कुल 35 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। साइबर क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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डिजिटल अरेस्ट का षड्यंत्र: साकेत नगर निवासी एलआईसी और पोस्ट ऑफिस एजेंट उमा समद्दार के पास अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से खुले बैंक खाते में आतंकियों ने सात करोड़ रुपये जमा किए हैं, जिसके चलते उन्हें और उनके बच्चों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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फर्जी पुलिस हेडक्वार्टर का खौफ: ठगों ने वीडियो कॉल पर ऐसा माहौल रचा जैसे कोई पुलिस मुख्यालय या बड़ी जांच एजेंसी बैठी हो। गिरफ्तारी और बच्चों पर आफत का डर दिखाकर महिला से उसकी पूरी जमा-पूंजी और एफडी की रकम ऐंठ ली गई।
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किश्तों में ट्रांसफर किए 35 लाख रुपये: डर के मारे महिला ने 29 सितंबर 2025 को 21.57 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपियों ने उनकी एफडी तुड़वाकर 15 अक्टूबर को 8 लाख रुपये और जमा करवाए। लगातार मांग किए जाने पर महिला ने उधार लेकर साढ़े तीन लाख और एक लाख रुपये और ट्रांसफर कर दिए।
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साइबर हेल्पलाइन और पुलिस कार्रवाई: जब ठगों ने बार-बार पैसों की मांग जारी रखी, तो पीड़िता को संदेह हुआ और उसने साइबर हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज कराई। समय पर शिकायत होने से करीब 15 लाख रुपये खातों में होल्ड करा लिए गए थे। अब साइबर क्राइम की रिपोर्ट मिलने के बाद गोविंदपुरा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।




