भोपाल। शासकीय सेवकों को अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, सक्रिय, पेशेवर और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई मिशन कर्मयोगी योजना का मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।
डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए इस योजना के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, सॉफ्ट स्किल्स और प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जानी है, लेकिन प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी अब भी इससे दूर हैं।
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कुल 6 लाख 77 हजार शासकीय सेवकों में से केवल 3 लाख ने ही डिजिटल प्रशिक्षण लिया है, जबकि 53 प्रतिशत कर्मचारी अब तक प्रशिक्षित नहीं हो सके हैं। ऐसे में शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रमुख विभागों में भी प्रशिक्षण की स्थिति कमजोर
विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और राजस्व जैसे बड़े विभागों में डिजिटल प्रशिक्षण का प्रतिशत बेहद कम है। स्वास्थ्य विभाग में मात्र 14.09 प्रतिशत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 17.63 प्रतिशत और पीएचई विभाग में 20.77 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही प्रशिक्षण लिया है। राजस्व विभाग में भी यह आंकड़ा 26.49 प्रतिशत तक ही सीमित है। इससे साफ है कि जमीनी स्तर पर इस योजना का लाभ अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
कुछ विभागों ने दिखाई बेहतर प्रगति
हालांकि सामान्य प्रशासन, वन, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है। सामान्य प्रशासन विभाग में 85.78 प्रतिशत कर्मचारी प्रशिक्षित हो चुके हैं, जबकि वन विभाग में 70.94 प्रतिशत और स्कूल शिक्षा में 53.76 प्रतिशत कर्मचारी डिजिटल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। यह संकेत देता है कि इच्छाशक्ति और समन्वय के साथ इस योजना को सफल बनाया जा सकता है।
पदोन्नति और एसीआर से जोड़ा गया प्रशिक्षण
सरकार ने मिशन कर्मयोगी के तहत प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाते हुए इसे कर्मचारियों की पदोन्नति और एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) से भी जोड़ने की तैयारी की है। अधिकारियों को आइजीओटी (iGOT) पोर्टल पर सक्रिय उपयोगकर्ता बनाने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि सभी कर्मचारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
समय सीमा बढ़ी, फिर भी अधूरी तैयारी
इस प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए पहले 31 मार्च की समय सीमा तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है। बावजूद इसके कई विभागों में कोर्स मॉड्यूल तक तैयार नहीं हो पाए हैं, जिससे प्रशिक्षण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मिशन कर्मयोगी पोर्टल पर 4300 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन इनका उपयोग सीमित स्तर पर ही हो पा रहा है।
सरकार का लक्ष्य और चुनौती
अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला के अनुसार, भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों के लिए इस प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को नियम आधारित के बजाय भूमिका आधारित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।




