पवन जैन ने अपनी पोस्ट में 35 साल पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) के रूप में बिताए अपने दिनों को याद किया।

पूर्व डीजी पवन जैन।
HighLights
- रिटायर्ड डीजी के केस में 3 माह बाद भी कार्रवाई नहीं।
- भोपाल की हवा अब दिल्ली की तरह जहरीली हो रही है।
- बुजुर्गों और बच्चों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित है।
भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और बिगड़ते शहरी ढांचे को लेकर पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजी) पवन जैन ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वाटसएप पोस्ट में उन्होंने शहर की सुरक्षा स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
पवन जैन ने बताया कि पाॅश इलाके अरेरा कॉलोनी में मई 2026 में एक रिटायर्ड डीजी की कार को असामाजिक तत्वों ने टक्कर मार दी थी।
घटना के तत्काल बाद हबीबगंज पुलिस और थाना प्रभारी को सीसीटीवी फुटेज व तमाम साक्ष्य सौंपे गए। इसके बावजूद तीन महीने बीत जाने पर भी आरोपितों के खिलाफ कोई एफआईआर या कार्रवाई नहीं हुई।
हम बता दें कि यह अकेले पुलिस के डीजी के पीड़ा नही है कि राजधानी के पाॅश और हाई-प्रोफाइल इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती नजर आ रही है।
अरेरा कॉलोनी में कुछ माह पहले एमपी एटीएस के आईजी का सरेराह मोबाइल छीन लिया गया था। वहीं, दो दिन पहले सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील चार इमली क्षेत्र में एक विधायक के घर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।
इन लगातार घटनाओं ने हबीबगंज पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में हबीबगंज थाने की कमान संजीव चौकसे के पास है, जिन्हें दूसरी बार भोपाल में पदस्थ किया गया है।
35 वर्षों में बदला शहर का स्वरूप
- पवन जैन ने अपनी पोस्ट में 35 साल पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) के रूप में बिताए अपने दिनों को याद किया।
- उन्होंने लिखा कि कभी ‘हरा-भरा और शिमला जैसा’ दिखने वाला यह शहर अब कचरे, मलबे और प्रदूषण के ढेर में तब्दील हो चुका है।
- भोपाल की हवा अब दिल्ली की तरह जहरीली हो रही है।
- शाम के समय बुजुर्गों और बच्चों का घर से बाहर निकलना असुरक्षित महसूस होता है।
प्रशासन की बेपरवाही पर उठाए सवाल
- पूर्व डीजी ने कहा कि उन्होंने 10 नंबर मार्केट और आसपास के निवासियों की समस्याओं से तत्कालीन मुख्य सचिव को भी अवगत कराया था। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
- सत्ता के गलियारों में बैठे जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि भोपाल वासियों के जीवन व स्वास्थ्य के प्रति बेपरवाह बने हुए हैं।
- उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि यदि हम अपने बुजुर्गों और बच्चों की जान-माल की सुरक्षा नहीं कर सके, तो खुद को माफ नहीं कर पाएंगे।
- यह दुष्यंत कुमार का शहर है और इसकी गरिमा पुनर्स्थापित होनी चाहिए।




