Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

MP में राज्यसभा की एक सीट बचाने के लिए कांग्रेस की ‘घेराबंदी’, भाजपा की तीसरी सीट पर नजर ने बढ़ाई बेचैनी

 

कांग्रेस ने पिछले दो बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था। वे तीसरी बार जाने के इच्छुक नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व को अपनी भावना से …और पढ़ें

 

MP में राज्यसभा की एक सीट बचाने के लिए कांग्रेस की 'घेराबंदी', भाजपा की तीसरी सीट पर नजर ने बढ़ाई बेचैनी

कांग्रेस में उठ रही प्रदेश के नेता को ही राज्यसभा भेजने की मांग

HighLights

  1. कांग्रेस में उठ रही प्रदेश के नेता को ही राज्यसभा भेजने की मांग
  2. दलीय स्थिति के अनुसार दो भाजपा तो एक सीट कांग्रेस मिलेगी
  3. कांग्रेस ने पिछली दो बार दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था

 भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून में रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। इस पर प्रदेश के नेता को ही भेजने की मांग उठ रही है। विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने प्रदेश से किसी भी जमीनी नेता को भेजने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी नेताओं का मन टटोलने में लगे हैं।

उन्होंने वरिष्ठ विधायक अजय सिंह से भी भेंट की। इसे राज्यसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के पास एक सदस्य भेजने के लिए चार विधायक ही अतिरिक्त हैं। उधर, भाजपा भी तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने पिछले दो बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था। वे तीसरी बार जाने के इच्छुक नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व को अपनी भावना से अवगत भी करा चुके हैं। साथ ही यह भी कह चुके हैं कि यदि किसी एससी वर्ग के व्यक्ति को भेजा जाता है तो उन्हें प्रसन्नता होगी।

 

दरअसल, वे एक बार फिर दलित एजेंडे पर काम कर रहे हैं और बड़ा सम्मेलन भोपाल में कर चुके हैं। प्रदेश में एससी वर्ग के मतदाता कई सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। उधर, ओबीसी समीकरण के चलते पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और महिला प्रतिनिधित्व के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन के नाम चर्चा में हैं।

उधर, डा.सिंह ने यह मांग रख दी कि प्रदेश के किसी जमीनी नेता को राज्यसभा भेजा जाए। अन्य नेता भी इसके पक्ष में हैं। इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, अजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच दो दिन पहले हुई बैठक को चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा गया।

दरअसल, यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव है। यदि आवश्यक संख्या बल से अधिक होने के बाद भी पार्टी अपना सदस्य नहीं बनवा पाती है तो कार्यकर्ताओं में जोश भरने के प्रयास प्रभावित होंगे। इसका असर अगले साल होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस अभी से घर को सुरक्षित करने में जुट गई है।

उधर, जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि उनके पास प्रदेश अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी है और उसके लिए पूरा समय देना आवश्यक है। पार्टी जब प्रदेश इकाई से परामर्श करेगी तो कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया जाएगा।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply