एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य बीमा योजना का इंतजार: 2019 से अटका है 15 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का प्रस्ताव, पुलिस मॉडल पर उम्मीदें बरकरार
भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए चिकित्सा बीमा योजना लागू किए जाने का प्रस्ताव पिछले कई वर्षों से फाइलों में अटका हुआ है। वर्ष 2019 से कर्मचारी संगठनों द्वारा इस योजना को लागू करने की मांग की जा रही है और कई दौर की बैठकों में सुझाव भी दिए जा चुके हैं, लेकिन यह योजना आज तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। वर्तमान में प्रदेश के करीब 10 लाख अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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अंशदायी योजना से सरकार पर नहीं आएगा आर्थिक भार: कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह एक अंशदायी योजना होगी, जिसके तहत बीमा का प्रीमियम कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों की पेंशन से काटा जाएगा। क्लेम का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा, जिससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा।
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पुलिस विभाग के मॉडल का उदाहरण: मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अनुसार, मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में वर्ष 2013 से सफलतापूर्वक चिकित्सा बीमा योजना संचालित हो रही है। इस मॉडल के तहत केवल 60 रुपये मासिक प्रीमियम पर 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिल रहा है, क्योंकि इसमें किसी बाहरी कंपनी को ठेका देने के बजाय विभागीय समिति द्वारा संचालन किया जाता है।
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कर्मचारियों का रुख: कर्मचारी संगठनों का कहना है कि योजना का मॉडल चाहे जो भी हो, कर्मचारी इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। बस अब सरकार को जल्द से जल्द इसे औपचारिक रूप से लागू करना चाहिए, ताकि मंहगे इलाज के दौरान कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।




