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भोपाल में ₹305 करोड़ से बनेगा देश का पहला ग्रिड कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स, इंदौर-उज्जैन समेत 15 जिलों की बिजली होगी कंट्रोल

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल के एयरोसिटी में बनेगा देश का पहला ग्रिड कंट्रोल सेंटर: 305 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस अत्याधुनिक परिसर से नियंत्रित होंगे 15 जिलों के बिजली ग्रिड

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एयरोसिटी क्षेत्र में देश का अपनी तरह का पहला ग्रिड कंट्रोल सेंटर कॉम्प्लेक्स बनने जा रहा है। करीब 305 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस अत्याधुनिक परिसर के माध्यम से देश के पश्चिमी क्षेत्र यानी इंदौर-उज्जैन संभाग के 15 जिलों के बिजली ग्रिड को नियंत्रित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भोपाल की पहचान ऊर्जा क्षेत्र के एक बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत होगी।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • परियोजना का स्थान और लागत: भोपाल के एयरोसिटी क्षेत्र में लगभग 305 करोड़ रुपये की लागत से इस अत्याधुनिक ग्रिड कंट्रोल सेंटर का निर्माण किया जाएगा।

  • निर्माण एजेंसी और एमओयू: इस परियोजना का निर्माण भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा कराया जा रहा है। इसके लिए ग्रिड इंडिया लिमिटेड के साथ ‘कांसेप्ट टू कम्पलीशन’ एमओयू हो चुका है और इसके वास्ते भूमि भी आवंटित कर दी गई है।

  • किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ: इस कंट्रोल सेंटर से मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र यानी इंदौर और उज्जैन संभाग के कुल 15 जिलों के बिजली ग्रिड का संचालन और नियंत्रण किया जाएगा।

  • आधुनिक तकनीक का उपयोग: स्मार्ट ग्रिड और स्काडा (SCADA) जैसी डिजिटल और ऑटोमैटिक तकनीकों के माध्यम से बिजली के प्रवाह, वोल्टेज और लोड की सटीक मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के भरोसेमंद बिजली मिल सकेगी।

प्रशासनिक समीक्षा और समय-सीमा

हाल ही में भोपाल संभागायुक्त कार्यालय में संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा की अध्यक्षता में ग्रिड इंडिया लिमिटेड और भोपाल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में परियोजना की प्रगति, निविदा प्रक्रिया, भवन अनुज्ञा, पर्यावरणीय स्वीकृति और ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

संभागायुक्त ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर पूरी की जाएं और निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित दो साल की समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि इस आधुनिक ऊर्जा हब का लाभ जल्द से जल्द जनता को मिल सके।

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