एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना को बड़ा झटका: 48 लाख ग्रामीणों की मुफ्त रजिस्ट्री पर लगा ब्रेक, कानूनी कार्रवाई के डर से पटवारियों ने बनाई दूरी
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीणों को उनके भूखंड का मालिकाना हक और निःशुल्क रजिस्ट्री देने के निर्णय पर फिलहाल ब्रेक लगता नजर आ रहा है। सरकार के इस बड़े फैसले में पटवारियों की बेरुखी मुख्य बाधक बन गई है। भविष्य में जमीन के विवाद और कोर्ट-कचहरी के डर से पटवारी इस प्रक्रिया से कतरा रहे हैं, हालांकि राजस्व विभाग और सरकार ने उन्हें कानूनी सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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48 लाख ग्रामीणों को मुफ्त मालिकाना हक में रुकावट: सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे के आधार पर तैयार अभिलेखों के माध्यम से 48 लाख से अधिक लोगों को उनकी आवासीय भूमि का कानूनी हक और मुफ्त रजिस्ट्री देने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर पटवारियों के विरोध के कारण काम अटका हुआ है।
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3,800 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ रही सरकार: यदि इस प्रक्रिया का सामान्य पंजीकरण होता, तो सरकार को करीब 3,800 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता, लेकिन जनहित में सरकार ने इसे पूरी तरह निःशुल्क करने का निर्णय लिया। 17 सितंबर को इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा इस योजना का शुभारंभ भी किया जा चुका है।
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पटवारियों की चिंता और आशंकाएं: पटवारी संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह का कहना है कि भविष्य में जमीन को लेकर किसी भी तरह का विवाद उत्पन्न होने की स्थिति में व्यक्तिगत रूप से पटवारियों को अदालती कार्रवाई और मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते वे इससे बच रहे हैं। इस मुद्दे पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।
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शासन का स्पष्ट आश्वासन (कानूनी सुरक्षा): इस मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि पटवारी केवल ‘पदेन निष्पादक’ हैं और रजिस्ट्री सरकारी दस्तावेजों के आधार पर होगी। यदि भविष्य में कोई विवाद होता है, तो संबंधित पक्षों के साथ-साथ न्यायालय में केस लड़ने के लिए सरकारी वकील मौजूद रहेंगे, इसलिए कर्मचारियों को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।




