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MP में अटक सकता है नया कॉलोनाइजर एक्ट; मेट्रोपॉलिटन रीजन और फायर सेफ्टी नियमों के चलते मानसून सत्र में आना मुश्किल

 

भोपाल । भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन रीजन घोषित किया जा चुका है। प्राधिकरण के गठन के नियम तैयार हो गए हैं और इसे ग्राम व नगर निवेश के अधिकार भी दे दिए गए हैं यानी मेट्रोपॉलिटन रीजन में भवन अनुज्ञा से लेकर तमाम काम इसके माध्यम से होंगे।

इसके कारण कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन एक बार फिर टल सकता है।

2047 का विजन

दरअसल, मेट्रोपॉलिटन रीजन और वर्ष 2047 की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शहरी विकास का खाका खींचा जा रहा है। इसे देखते हुए कॉलोनाइजर एक्ट में प्रावधान करने होंगे। यही कारण है कि प्रारूप तैयार होने के बाद इसमें फिर सुधार किया जा रहा है।

ऐसे में विभागीय अधिकारियों का मानना है कि 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में एक्ट में संशोधन के लिए विधेयक प्रस्तुत हो पाना मुश्किल है।

वैसे सरकार का प्रयास है कि किसी तरह इसे भी शीघ्र लागू कर दिया जाए। हालांकि, फायर सेफ्टी और सिंहस्थ मेला अधिनियम में संशोधन के लिए वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक हो चुकी है।

इसे कुछ संशोधनों के साथ कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

वरिष्ठ सचिव समिति तय कर रही सख्त नियम

मध्य प्रदेश में शहरों के अनियोजित विकास और लगातार बन रहीं अवैध कॉलोनियों की रोकथाम के लिए वरिष्ठ सचिव समिति कॉलोनी विकास नियम (कॉलोनाइजर एक्ट-2026) पर काम कर रही है।

यह समिति कॉलोनी विकास के सख्त नियम तय कर रही है।

वर्तमान एक्ट में जो कमियां हैं, उनमें सुधार के सुझाव डेवलपरों ने भी दिए हैं। अवैध कालोनियों पर नियंत्रण के प्रावधान कॉलोनाइजर एक्ट का हिस्सा रहेंगे। प्रयास यही रहेगा कि अवैध कालोनियां बने ही नहीं और यदि कहीं बन गई तो उसके लिए ऐसे कड़े प्रावधान रहें कि आगे फिर कभी ऐसा न हो।

इसके लिए डेवलपर का लाइसेंस तो रद किया ही जाएगा, संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। अवैध कॉलोनी काटने वालों पर नए प्रावधान के तहत सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल तक की कैद और दो करोड़ रुपये तक जुर्माना करने की तैयारी है।

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