जनगणना निदेशालय ने सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2024 जारी किया है। इसके अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 35 प्रति हजार पर आ गई जो 2023 की …और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो, इंटरनेट मीडिया से ली गई है।
HighLights
- वर्ष 2014 की तुलना में एक दशक में IMR में 17 अंकों की कमी दर्ज की ग
- MP की शिशु मृत्यु दर घटकर 35 प्रति हजार जीवित जन्म हुई, 2023 में यह 37 थी
- प्रदेश में 62 SNCU और 200 NBSU इकाइयों के विस्तार से सेवाओं में सुधार हुआ
भोपाल। जनगणना निदेशालय द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन-2024 में मध्य प्रदेश के लिए राहतभरी तस्वीर सामने आई है।
प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (IMR) घटकर अब 35 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है, जबकि वर्ष 2023 की रिपोर्ट में यह दर 37 थी।
जन्म लेने वाले बच्चों की मृत्यु में आई कमी
इसका अर्थ है कि प्रदेश में जन्म लेने वाले प्रत्येक हजार बच्चों में अब 35 बच्चों की एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो रही है। हालांकि स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन पिछले एक दशक में इसमें उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर वाले राज्य का कलंक मिटा
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में मध्य प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो अब घटकर 35 पर पहुंच गई है। यानी 10 वर्षों में 17 अंकों की कमी आई है। खास बात यह है कि अब सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर वाले राज्य का कलंक भी मध्य प्रदेश से हट गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ की IMR वर्तमान में 36 दर्ज की गई है।
नई इकाइयां स्थापित की गईं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 62 विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (SNCU), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (NBSU) तथा मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों (MNCU) का विस्तार किया गया है।
इसके अलावा संस्थागत प्रसव, नवजात देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के कारण लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।




