एनजीटी ने बड़ा तालाब अतिक्रमण मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश नहीं करने पर नगर निगम भोपाल पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

प्रशासन ने अब तक सिर्फ 57 अवैध निर्माण तोड़े, आलीशान कोठी-बंगले छोड़े । फाइल फोटो।
HighLights
- एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश नहीं करने पर नगर निगम भोपाल पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया
- चिह्नित 347 अवैध निर्माणों में से केवल 57 हटाए जा सके, जबकि 290 निर्माणों पर कार्रवाई अब भी लंबित है
- 22 जुलाई को अगली सुनवाई, एनजीटी ने लंबित मामलों में तेजी लाने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के दिए निर्देश
भोपाल । बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) को अतिक्रमण मुक्त कराने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कई आदेशों के बावजूद एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत नहीं करने पर एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन पीठ ने निगम पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान द्वारा बड़े तालाब के (एफटीएल) के 50 मीटर बफर जोन के भीतर हुए कथित अवैध निर्माण, भूमि भराव, मलबा और कचरा डंपिंग, जल प्रवाह में बाधा तथा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर दायर पर न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई की।
20 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया
याचिका में कहा गया है कि इन गतिविधियों से रामसर साइट घोषित भोज वेटलैंड की पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है और शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी खतरा बढ़ रहा है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने बताया कि एनजीटी पूर्व की पांच सुनवाई में नगर निगम को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दे चुका था।
पिछली सुनवाई में भी निगम को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद न तो एटीआर दाखिल की गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया गया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए ट्रिब्यूनल ने निगम पर 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
पिछली सुनवाई में भी लगाई थी फटकार
बता दें कि 28 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी अधिकरण ने 12 नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अतिक्रमण हटाने, फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और बफर जोन का सीमांकन करने तथा पारिस्थितिकी आकलन की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर निगम को फटकार लगाई थी।
तब निगम ने एनजीटी के सामने तर्क दिया कि अतिक्रमण हटाना एक सतत प्रक्रिया है और कई मामलों में उच्च न्यायालय से स्टे आदेश मिल जाते हैं, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर कड़ा रुख बरकरार रखते हुए कहा कि जहां स्टे आदेश नहीं हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए।
347 में से सिर्फ 57 अवैध निर्माणों पर हो सकी कार्रवाई
दरअसल, एनजीटी ने बड़े तालाब के एफटीएल के 50 मीटर दायरे में अवैध निर्माणों को चिह्नित कर हटाने के निर्देश दिए थे। करीब साढ़े चार महीने पहले जिला प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त रूप से सीमांकन करते हुए 347 अवैध निर्माण चिह्नित किए थे।
हालांकि, चिह्नित अवैध निर्माणों में से अब तक केवल 57 ही हटाए जा सके हैं, जबकि 290 निर्माण अब भी जस के तस खड़े हैं। इनमें कई आलीशान कोठी और बंगले शामिल हैं। अभी बोट क्लब क्षेत्र के कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य निर्माणों पर भी कार्रवाई लंबित है।




