मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने यात्री बसों की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। …और पढ़ें
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MP में यात्री बसों की सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग की नई घेराबंदी (AI Generated Image)
HighLights
- पैनिक बटन और VLTD अनिवार्य
- हफ्ते में दो दिन औचक निरीक्षण
- अवैध बॉडी विस्तार पर धारा 207
भोपाल: मध्य प्रदेश में यात्री बसों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए अब केवल कागजी खानापूर्ति नहीं चलेगी। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बसों में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इनका विभाग के कमांड सेंटर (ट्रैकिंग सर्वर) से निरंतर जुड़ा होना अनिवार्य है। यदि जांच के दौरान डिवाइस से लाइव डेटा नहीं मिलता है, तो इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
सघन जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट की तकनीकी रिपोर्ट और 26 नवंबर 2025 की कार्यवाही के आधार पर तय किए गए नए सुरक्षा मानकों को लेकर विभाग सख्त है। सभी संभागायुक्तों और आरटीओ को निर्देशित किया गया है कि वे सप्ताह में कम से कम दो दिन अपनी सीमाओं में बसों का सघन औचक निरीक्षण करें। जांच के दौरान यदि बस में अतिरिक्त सीटें या अवैध बॉडी विस्तार पाया जाता है, तो मोटरयान अधिनियम की धारा 207 के तहत बस को तत्काल जब्त किया जाएगा।
मैदानी अमले की कमी और संयुक्त टीमें
निरीक्षण को प्रभावी बनाने के लिए परिवहन विभाग, पुलिस और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी। यह कदम मैदानी अमले की कमी को देखते हुए उठाया गया है। यह टीमें न केवल तकनीकी उपकरणों की जांच करेंगी, बल्कि बस की भौतिक स्थिति और सुरक्षा मानकों का भी सत्यापन करेंगी।
चुनौतियां: कागजों पर आसान, जमीन पर मुश्किल
नए नियमों के कार्यान्वयन में कई व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं:
- सीमित स्टाफ: प्रदेश में हजारों रजिस्टर्ड बसें हैं, जबकि आरटीओ अमले की संख्या सीमित है, जिससे हर बस की नियमित जांच कठिन है।
- तकनीकी बुनियादी ढांचा: 24×7 मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में मजबूत कंट्रोल रूम और तकनीकी स्टाफ का अभाव है।
- निजी ऑपरेटरों का समन्वय: अलग-अलग रूटों पर चलने वाली निजी बसों पर एकसमान निगरानी रखना एक बड़ी चुनौती है।
- तात्कालिक कार्रवाई: पैनिक बटन खराब होने पर परमिट निरस्त करने से यात्रियों की सुविधा प्रभावित हो सकती है, जिससे तत्काल निर्णय लेना जटिल हो जाता है।
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विभाग इन चुनौतियों के बावजूद तकनीक और सख्त निगरानी के जरिए प्रदेश में सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रसर है।




