एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / अपराध एवं सुरक्षा डेस्क
रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल हत्याकांड: आगरा से गिरफ्तार आरोपी वरुण कुमार का भोपाल लाते वक्त शॉर्ट एनकाउंटर; मुगलिया छाप के पास भागने की कोशिश पर पैर में लगी गोली, हमीदिया अस्पताल में भर्ती
भोपाल: राजधानी भोपाल के बहुचर्चित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल हत्याकांड में एक बड़ा और सनसनीखेज मोड़ आया है। पूर्व आईएएस की निर्मम हत्या करने के बाद से लगातार पुलिस को चकमा दे रहे मुख्य आरोपी वरुण कुमार को भोपाल पुलिस की टीम आखिरकार उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार कर वापस भोपाल लेकर आ रही थी। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे जब पुलिस टीम उसे लेकर भोपाल की सीमा यानी मुगलिया छाप के पास पहुंची, तो आरोपी ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस के साथ हुई झूमाझटकी और मुठभेड़ (शॉर्ट एनकाउंटर) में आरोपी के पैर में गोली लग गई। घायल अवस्था में उसे इलाज के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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आगरा से की गई थी गिरफ्तारी: रिटायर्ड आईएएस की हत्या के बाद से आरोपी वरुण कुमार पूरी तरह से तकनीक से दूर रहकर पुलिस को गुमराह कर रहा था। वह किसी भी मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग नहीं कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रैक करना बेहद मुश्किल था। आखिरकार भोपाल पुलिस ने कड़े संघर्ष के बाद उसे आगरा से दबोचने में सफलता हासिल की थी।
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मुगलिया छाप के पास एनकाउंटर: पुलिस टीम जब उसे ट्रेन या वाहन से ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल ला रही थी, तब मंगलवार सुबह करीब 5:00 बजे जैसे ही गाड़ी मुगलिया छाप के नजदीक पहुंची, आरोपी ने पुलिसकर्मियों के साथ झूमाझटकी की और चकमा देकर भागने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ और रोकने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लग गई।
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हमीदिया अस्पताल में भर्ती: मुठभेड़ में घायल होने के बाद आरोपी वरुण कुमार को तत्काल भोपाल लाया गया और सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच उसे हमीदिया अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी और वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है।
क्या था पूरा सनसनीखेज मामला?
गत 29-30 सितंबर 2026 की दरमियानी रात भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत सूरज नगर इलाके में स्थित एक आलीशान कोठी में रहने वाले 72 वर्षीय रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।
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साजिश के तहत हत्या और लूट: हत्या को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि उनके यहां हाल ही में रखा गया केयरटेकर वरुण कुमार ही था। आरोपी ने ब्लेड से उनका गला काटने के बाद घर में रखा सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान समेट लिया था।
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हादसा दिखाने की खतरनाक कोशिश: हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने और वारदात को एक हादसा या सिलेंडर ब्लास्ट का रूप देने के लिए आरोपी ने शातिर साजिश रची थी। भागने से पहले उसने किचन में गैस चूल्हे का रेगुलेटर चालू कर दिया और उसके ऊपर चालू हालत में इलेक्ट्रिक प्रेस रख दी थी, ताकि घर में जोरदार धमाका हो जाए और आग लग जाए। गनीमत रही कि समय रहते इस बड़े खतरे को टाल दिया गया।
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पुलिस की इनाम घोषणा और तलाश: वारदात के बाद आरोपी ट्रेन से भागकर आगरा पहुंच गया था और मृतक आईएएस का मोबाइल फोन अपने एक दोस्त को दे दिया था। पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं और उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। अब पुलिस अभिरक्षा से भागने के प्रयास में हुए एनकाउंटर के बाद इस मामले की कड़ियां पूरी तरह से जुड़ चुकी हैं।




