इस मामले में पुलिस ने इंदौर क्राइम ब्रांच के एक आरक्षक को भी पकड़ा था, जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। मामला संवेदनशील होने के चलते सबसे पहले आतं …और पढ़ें

सीडीआर मामले में एफआईआर दर्ज।
HighLights
- संदिग्धों की भी निकाली जाएगी सीडीआर।
- इंदौर पुलिस का एएसआई रामपाल शामिल है।
- पता लगाया जाएगा कि ये किनके संपर्क में थे।
भोपाल। कुछ लोगों की कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) और मोबाइल टावर लोकेशन निजी लोगों को साझा करने के आरोप में राज्य साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। साइबर मुख्यालय की पुलिस इस मामले में तीन संदिग्धों से पूछताछ कर रही है।
इनमें एक डिटेक्टिव एजेंसी से जुड़े दो लोग और इंदौर पुलिस का एएसआई रामपाल शामिल है। पुलिस अब संदिग्धों का भी काॅल डिटेल रिकार्ड निकालने जा रही है, जिससे पता चले कि ये किन लोगों के संपर्क में थे।
साथ ही इनके मोबाइल फोन का रिकार्ड भी निकाला जाएगा। पुलिस को यह भी शक है कि पकड़े जाने के डर से संदिग्धों ने कुछ जानकारी अंतिम रूप से मोबाइल व अन्य डिवाइस से डिलीट कर दी हो।
बता दें कि इस मामले में पुलिस ने इंदौर क्राइम ब्रांच के एक आरक्षक को भी पकड़ा था, जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। मामला संवेदनशील होने के चलते सबसे पहले आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने पूछताछ की थी,जिससे पता चल सके संदिग्ध कहीं देश विरोधी तत्वों के संपर्क में तो नहीं थे। अब इसे साइबर पुलिस को सौंप दिया गया है।
फर्जी कॉल सेंटर मामले में ठगे गए लोगों और काॅल करने वाले कर्मचारियों से होगी पूछताछ एक दिन पहले विदिशा जिले के गंजबासौदा में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर में साइबर पुलिस मुख्यालय कॉल करने वाले कर्मचारियों और ठगे गए लोगों से भी पूछताछ करेगी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल करने वाले कर्मचारियों को फर्जीवाड़े के संबंध में जानकारी नहीं थी। वे आरोपित योगेंद्र सिंह और उसके साथ काम करने वाली एक महिला के बताए अनुसार लोगों को नौकरी दिलाने के लिए काॅल करते थे।
बता दें कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रविवार को काॅल सेंटर पर छापा मारकर योगेन्द्र और उसकी महिला सहयोगी को गिरफ्तार किया था। वह इटावा का रहने वाला है। उसके पास से 20 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं। आरोपित लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे थे।




