एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पर असमंजस: शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग के सामने रखे आठ तीखे सवाल, नियमों की स्पष्टता और दिशा-निर्देशों की मांग
भोपाल: स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को परीक्षा एजेंसी घोषित किए जाने और परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों के पदनाम संबंधी आदेश जारी होने के बाद, प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने विभाग से कड़े सवाल पूछे हैं। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों उपेंद्र कौशल और राजेश मिश्रा ने विशेष रूप से पहले से नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कार्यरत शिक्षकों पर असमंजस और कोर्ट का मामला: शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर ग्वालियर खंडपीठ में ‘राजेश मिश्रा विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन’ प्रकरण चल रहा है। 7 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ टीईटी में शामिल न होने पर कानूनी कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे और नोटिस जारी किए थे। इसी बीच 15 सितंबर को नया आदेश आने से सेवारत शिक्षकों में अपनी नौकरी और सेवा शर्तों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।
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शिक्षक संगठनों द्वारा पूछे गए प्रमुख सवाल:
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वर्ष 2018 से पहले नियुक्त शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति और सेवा निरंतरता पर टीईटी का क्या प्रभाव पड़ेगा?
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टीईटी में शामिल होने या उत्तीर्ण होने से प्रथम नियुक्ति तिथि, वरिष्ठता, वेतन, पेंशन और अन्य सेवाकालीन लाभ प्रभावित होंगे या नहीं?
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वर्ष 2018 के भर्ती नियमों के नियम 11(2) का वैधानिक आधार क्या है और यह किन शिक्षकों पर लागू होगा?
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पोर्टल पर नियुक्ति तिथि सुरक्षित रखने की मांग: संगठनों ने मांग की है कि ‘शिक्षा पोर्टल 3.0’ में दर्ज शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। परीक्षा में शामिल होने या पास होने से उनकी पूर्व में दर्ज वरिष्ठता और नियुक्ति वर्ष में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।
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लिखित दिशा-निर्देशों की मांग: शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले विभाग को संवर्ग और नियुक्ति वर्ष के आधार पर विस्तृत एवं स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि शिक्षकों की शंकाओं का समाधान हो सके।




