मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ रही हैं। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने विषय सुनने के बाद कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी…और पढ़ें
HighLights
- प्रदेश में बड़े पैमाने पर वनभूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है
- कृषि योग्य वनभूमि पर कब्जे के लिए संगठित गिरोह सक्रिय हैं
- वनकर्मियों के पास प्रभावी जवाबी कार्रवाई के सीमित अधिकार हैं
भोपाल । प्रदेश भले ही वन आवरण वाले राज्यों में शीर्ष स्थान पर है लेकिन यहां के जंगल अतिक्रमण के शिकार हैं। प्रदेश की 14.21 लाख एकड़ वन भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है और जंगल की जमीन पर कब्जे लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।
प्रदेश में जंगल की जमीन पर अतिक्रमणकारियों का एक संगठित गिरोह सक्रिय है। 200 से 250 की सदस्य संख्या वाला यह गिरोह जंगल की ऐसी भूमि चिह्नित करता है जो उपजाऊ और कृषि योग्य है। बाद में यहां अंदर ही अंदर पेड़ों की कटाई कर खेती योग्य सपाट मैदान बनाया जाता है।
स्थानीय वन अमले को इसकी खबर होती है वे अतिक्रमणकारियों को हटाने का प्रयास भी करते हैं लेकिन संगठित गिरोह की संख्या के आगे पुलिस, प्रशासन और वन अधिकारियों सहित सरकारी अमला नाकाफी होता है।
पुलिस, प्रशासन और मंत्री भी रहे नाकाम
हाल ही में खंडवा जिले में अतिक्रमणकारियों द्वारा प्रशासन पर पत्थरबाजी कर खदेड़ने का यह कोई नया प्रकरण नहीं है। इससे पहले भी खंडवा, बुरहानपुर, देवास जैसे अन्य जिलों में इस तरह के गिरोह जंगल की जमीन पर अतिक्रमण कर चुके हैं लेकिन इन्हें हटाया नहीं जा सका।
यहां तक कि पांच-पांच तत्कालीन वन मंत्री भी अपने कार्यकाल में गृह जिले के जंगल की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में नाकाम रहे हैं। बता दें, पिछले वर्ष जंगल की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश दिए थे कि मध्य प्रदेश में जहां वनवासी निवासरत है, उन्हें कोई परेशानी न हो, लेकिन अधिकारी एवं वन विभाग का मैदानी अमला यह भी सुनिश्चित करे कि वन भूमि पर अब कोई भी नया अतिक्रमण कदापि न होने पाएं।
बता दें, वन भूमि पर अतिक्रमण की एक वजह यह भी है कि कई बार अतिक्रमणकारियों के पास हथियार होते हैं वे वन अमले पर जानलेवा हमला कर देते हैं लेकिन वन अमले को जवाबी कार्रवाई में शस्त्र चलाने का अधिकार न होने से वह कुछ नहीं कर पाते।
राज्य मंत्री ने फोन काटा, मैसेज का जबाव भी नहीं दिया
वनभूमि पर अतिक्रमण को लेकर वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार से बात की गई तो उन्होंने अतिक्रमण का पूरा विषय सुना और जवाब देने से पहले ही वाट्सएप कॉल काट दिया। बाद में संदेश का भी कोई जवाब नहीं। सबसे अधिक अतिक्रमण बुरहानपुर में प्रदेश में सर्वाधिक अतिक्रमण बुरहानपुर में हैं। यहां राज्य सरकार भी अतिक्रमण रोकने में नाकाम रही है
बुरहानपुर में 1,90,102 हेक्टेयर अधिसूचित वन क्षेत्र हैं। इनमें से 52,751 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण पाया गया है। यहां अतिक्रमणकारियों द्वारा वन अमले पर भी हमला करने की घटनाएं कई बार देखने में आई हैं।
पांच साल में वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रकरण और प्रभावित क्षेत्र वर्ष
| वर्ष | दर्ज प्रकरण (संख्या) | अतिक्रमित क्षेत्र (हेक्टेयर में) |
| 2021 | 1,825 | 2,110.00 |
| 2022 | 1,593 | 3,298.00 |
| 2023 | 1,257 | 2,161.00 |
| 2024 | 1,774 | 4,275.00 |
| 2025 | 2,345 | 4,292.45 |
पहले की परिस्थितियां अलग थीं, अब वन भूमि पर अतिक्रमण करने के लिए संगठित गिरोह काम करता है। इन्हें रोकने के लिए हम प्रयासरत हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए हमें अपने वन अमले को और अधिक सशक्त करना होगा। वन भूमि पर अतिक्रमण न हो इसको लेकर समय- समय पर कार्रवाई भी जाती रही है। हम इस दिशा में एक ठोस कार्ययोजना भी बनाएंगे ताकि ऐसी परिस्थितियों से निपटा जा सके। – अमित कुमार दुबे, एपीसीसीएफ, संरक्षण, मध्य प्रदेश वन




