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AIR INDIA-विमान हादसे में मिले सोने का क्या होगा? जानें कौन कर सकता है दावा

नई दिल्ली: 12 जून को अहमदाबाद में हुए AIR INDIA के विमान AI-171 के दुखद हादसे के मलबे से कई कीमती सामान मिले हैं। इनमें करीब 70 तोले (लगभग 800 ग्राम) सोने के गहने, 80 हजार रुपये नकद, एक भगवद् गीता और कुछ पासपोर्ट शामिल हैं। फिलहाल यह सारा सामान सरकार की देखरेख में सुरक्षित रखा गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये के इस सोने का असली मालिक कौन है और इस पर किसका हक होगा।

क्या मिला और कहाँ है अभी? दुर्घटनास्थल से बरामद यह सारा कीमती सामान, जिसमें सोना और नकदी शामिल है, अभी पुलिस और सरकारी अधिकारियों (जैसे जिला प्रशासन) के पास है। इसे सरकारी खजाने या किसी सुरक्षित लॉकर में रखा गया है। सरकार की पहली प्राथमिकता है कि इन सामानों के असली मालिक या उनके कानूनी वारिसों तक पहुंचा जा सके। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने 15 जून 2025 को बताया था कि सभी बरामद सामान की पहचान की जाएगी और उन्हें मृतकों के सबसे करीबी रिश्तेदारों को सौंपा जाएगा।

मालिक की पहचान कैसे होगी? इस विमान हादसे में 241 यात्री और जमीन पर 28 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसलिए शवों की पहचान के लिए डीएनए (DNA) मिलान का सहारा लिया जा रहा है। सोने और अन्य सामानों के मालिकों की पहचान भी इसी तरह की प्रक्रिया से होगी। इसके लिए यात्रियों के सामान (जैसे पासपोर्ट, टिकट या सामान की रसीद) और उनके परिवारों द्वारा दी गई जानकारी का मिलान किया जाएगा। यदि गहनों की खरीद की रसीद जैसे कोई दस्तावेज़ मिलते हैं, तो पहचान करना और भी आसान हो जाएगा।

कानूनी वारिस कौन होंगे? भारतीय कानून के हिसाब से, किसी भी मृत व्यक्ति की संपत्ति (जैसे सोना, नकदी) उनके कानूनी वारिसों को मिलती है। यह प्रक्रिया अलग-अलग धर्मों के लिए बने कानूनों के तहत होती है, जैसे हिंदुओं के लिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, मुसलमानों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) और ईसाइयों के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925।

अगर कोई दावा न करे तो क्या होगा? अगर सोने या अन्य सामान का कोई कानूनी वारिस दावा नहीं करता है, तो ये चीज़ें ‘अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी’ (बिना दावे वाली संपत्ति) मानी जाती हैं। भारतीय कानून के अनुसार, ऐसी संपत्ति को एक तय समय (आमतौर पर 7 साल) तक सरकार अपने पास रखती है। यदि इस दौरान भी कोई दावेदार सामने नहीं आता, तो यह संपत्ति सरकार की हो जाती है। अगर यात्रियों ने अपने सामान का बीमा कराया था, तो पहचान होने के बाद उनके वारिसों को बीमा की रकम भी मिल जाएगी।

अब तक कितनी पहचान हुई? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के बाद अब तक 162 मृतकों की पहचान डीएनए जांच के जरिए हो चुकी है। हादसे में मिले सामान को भी उनके परिवारों को सौंपने का काम शुरू किया जा चुका है। यह भी जानना जरूरी है कि अगर कोई व्यक्ति हादसे के बाद ऐसा कोई सामान अपने पास रखता है तो यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 403 (आपराधिक विश्वासघात) या धारा 406 (विश्वास का आपराधिक उल्लंघन) के तहत अपराध माना जा सकता है।

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