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मप्र में भी UCC की सुगबुगाहट शुरू, उत्तराखंड के कानून का कराया जाएगा अध्ययन, किसी विधानसभा सत्र में विधेयक लाने की तैयारी

 

भोपाल। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्य प्रदेश में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राज्य सरकार उत्तराखंड के कानून का अध्ययन कराएगी। यदि समय रहते तैयारी हो गई तो 2026 के ही किसी विधानसभा सत्र में इससे संबंधित विधेयक लाया जा सकता है।

इस बात पर चर्चा हो रही है कि कानून बनाने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए जाएं। सुझाव आने के बाद उन्हें कानून में शामिल किया जाए।

यूसीसी को लेकर पहले भी कवायद हो चुकी है

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में एक सवाल के जवाब में यूसीसी को अच्छा विचार बताते हुए कहा है कि सभी को विश्वास में लेकर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर पहले भी कवायद हो चुकी है।

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी

दिसंबर, 2022 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि यूसीसी लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। हालांकि इसके कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनाव आ गए और बात आगे नहीं बढ़ी।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसने 27 जनवरी, 2025 से यूसीसी को पूरी तरह लागू कर दिया है। मध्य प्रदेश सरकार वहां के विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण संबंधी प्रावधानों का विश्लेषण कर रही है।

यूसीसी की विशेषताएं

यूसीसी का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के अधिकारों पर पड़ने की उम्मीद है, वे किसी भी धर्म की हों। यदि यूसीसी कानून बना तो समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारा जा सकता है। लव-जिहाद और भूमि-जिहाद जैसे मामलों के बढ़ने के कारण हिंदू जागरण मंच भी मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बना रहा है।

पैतृक संपत्ति में कानूनी अधिकार

लड़कियों को पिता की संपत्ति में लड़कों के बराबर कानूनी अधिकार मिलेगा। हालांकि, उत्तराखंड माडल में कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों को छूट दी गई है।

विवाह और तलाक

बहुविवाह पर पूर्ण रोक लगेगी और तलाक की प्रक्रिया सभी धर्मों की महिलाओं के लिए समान व न्यायपूर्ण होगी।

तलाक के बाद भरण-पोषण

तलाक के बाद महिलाओं को मिलने वाले गुजारे भत्ते के नियम स्पष्ट और एक समान होंगे।

लिव-इन में रहने वालों का अनिवार्य पंजीकरण

लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना होगा।

बच्चों को कानूनी मान्यात, संपत्ति में अधिकार

इससे लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को कानूनी मान्यता और संपत्ति में अधिकार मिलेगा। जनजातीय समुदायों को छूट: उत्तराखंड के यूसीसी माडल में जनजातीय समुदायों को बाहर रखा गया है।

मध्य प्रदेश में भी बड़ी आदिवासी जनसंख्या को देखते हुए संभव है कि उनके पारंपरिक रीति-रिवाज, विवाह की विशिष्ट पद्धतियों को इस कानून से छूट दी जाए

समान नागरिक संहिता के बारे में भाजपा लगातार संकल्पबद्ध रही है। इसलिए लोकसभा चुनाव में भी इस संकल्प को दोहराया गया है। संविधान के दायरे में विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए उचित समय पर उचित निर्णय किया जाएगा।

-रजनीश अग्रवाल, प्रदेश मंत्री, भाजपा मध्य प्रदेश

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